शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ (HPUTWA) के बैनर तले 24 सितंबर को आयोजित विरोध कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पूर्व विद्यार्थी एवं पूर्व मंत्री सुरेश भारद्वाज ने अपने विचार रखे। उन्होंने विश्वविद्यालय की स्वायत्तता, अकादमिक स्वतंत्रता तथा हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 से जुड़े विषयों पर अपनी बात रखते हुए विधेयक को “काला विधेयक” बताया।
कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पूर्व कर्मचारी चौधरी वरियाम सिंह बैंस, डॉ. जोगेंद्र सकलानी, डॉ. अंकुश भारद्वाज, डॉ. अंजली शर्मा तथा HPUTWA के अध्यक्ष प्रोफेसर नितिन व्यास ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने विश्वविद्यालय की स्वायत्तता, अकादमिक स्वतंत्रता और संस्थागत गरिमा के महत्व को रेखांकित किया तथा इस विषय पर व्यापक संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया।
HPUTWA ने कहा कि विश्वविद्यालयों में जवाबदेही और पारदर्शिता आवश्यक है, लेकिन इसके साथ अकादमिक एवं संस्थागत स्वायत्तता को सुरक्षित रखना भी महत्वपूर्ण है। विश्वविद्यालय ज्ञान, शोध, नवाचार और स्वतंत्र चिंतन के केंद्र हैं, इसलिए उनसे जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों पर विश्वविद्यालय समुदाय की चिंताओं और विचारों को भी उचित महत्व दिया जाना चाहिए।
25 सितंबर को काले रिबन के साथ शांतिपूर्ण मार्च
HPUTWA द्वारा 25 सितंबर को HPU परिसर में काले रिबन लगाकर शांतिपूर्ण मार्च आयोजित किया जाएगा। संघ ने सभी शिक्षकों, गैर-शिक्षक कर्मचारियों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं समस्त विश्वविद्यालय परिवार से मार्च में शामिल होकर अपनी लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण सहभागिता दर्ज करवाने की अपील की है।
📍 Location: शिमला (शिमला)

