Last Updated: October 16, 2026

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भवनों से सड़कों तक सौर ऊर्जा का नया मॉडल, एचपीयू में आधुनिक तकनीकों पर मंथन

October 16, 2026

भवनों से सड़कों तक सौर ऊर्जा का नया मॉडल, एचपीयू में आधुनिक तकनीकों पर मंथन

HPU Workshop Explores Advanced Solar Energy Technologies : शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) में सौर ऊर्जा की आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। सेंटर फॉर ग्रीन एनर्जी एंड नैनोटेक्नोलॉजी की ओर से आयोजित इस कार्यशाला में विद्यार्थियों को बिल्डिंग-इंटीग्रेटेड फोटोवोल्टिक्स (बीआईपीवी) और रेल-रोड इंटीग्रेटेड फोटोवोल्टिक्स (आरआईपीवी) तकनीकों की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि भवनों, रेलवे और सड़क परिवहन से जुड़े बुनियादी ढांचे को सौर ऊर्जा उत्पादन का माध्यम बनाकर स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा दिया जा सकता है। कार्यशाला में तकनीकी नवाचार, ऊर्जा दक्षता और उद्योग-शिक्षा संस्थानों के सहयोग पर भी जोर दिया गया।

इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (ईसीई) और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों के लिए आयोजित इस कार्यशाला में बिल्डिंग-इंटीग्रेटेड फोटोवोल्टिक्स (बीआईपीवी) तथा रेल-रोड इंटीग्रेटेड फोटोवोल्टिक्स (आरआईपीवी) तकनीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इन तकनीकों के माध्यम से भवनों और परिवहन ढांचे को सौर ऊर्जा उत्पादन के स्रोत के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा की गई। कार्यशाला का समन्वय डॉ. अंजलि शर्मा, डॉ. जेस्मिन कौर और डॉ. मनीष ने किया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को उभरती सौर तकनीकों का तकनीकी ज्ञान देने के साथ उनके व्यावहारिक उपयोग से परिचित कराना था।

कार्यशाला में विद्यार्थियों को बताया गया कि किस प्रकार आधुनिक फोटोवोल्टिक प्रणालियों को भवनों, रेल और सड़क परिवहन से जुड़े बुनियादी ढांचे में एकीकृत कर स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सकता है। कार्यशाला को डॉयचे गेसेलशाफ्ट फ्यूर इंटरनेशनेल जुसामेनआर्बाइट (जीआईजेड) का सहयोग प्राप्त है। इस पहल में ग्रांट थॉर्नटन भारत एलएलपी, सीएसटीईपी, सीएसआईआर-एनआईआईएसटी और उद्योग जगत के साझेदार भी सहयोग कर रहे हैं। इसका उद्देश्य देश में उन्नत सौर ऊर्जा समाधानों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा इनके नवाचार और उपयोग को प्रोत्साहित करना है।

पारंपरिक बुनियादी ढांचे से भी हो सकता है ऊर्जा उत्पादन कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में उद्योग विशेषज्ञ वरुण सिंह, विनीत भाटिया, निशांत वर्मा, नेहा टिपले, अक्षय भारद्वाज, परेश नाडिग और ऋषभ शर्मा ने विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव और तकनीकी जानकारियां साझा कीं। विशेषज्ञों ने पारदर्शी सौर सामग्रियों, भवनों में फोटोवोल्टिक प्रणालियों के एकीकरण, परिवहन बुनियादी ढांचे में सौर तकनीक के इस्तेमाल, सौर प्रणाली के डिजाइन और ऊर्जा दक्षता जैसे विषयों पर जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि नवीन फोटोवोल्टिक तकनीकों के जरिए पारंपरिक बुनियादी ढांचे को स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन करने वाली प्रणालियों में बदला जा सकता है।

भवनों और परिवहन से जुड़ी संरचनाओं में सौर तकनीक का समावेश ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इससे विद्यार्थियों को न केवल तकनीकी विकास की जानकारी मिली, बल्कि नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में उद्योग की कार्यप्रणाली और रोजगार एवं नवाचार की उभरती संभावनाओं को समझने का अवसर भी मिला। उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग पर जोर कार्यशाला के दौरान अकादमिक ज्ञान को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने तथा विद्यार्थियों में तकनीकी कौशल, अनुसंधान और नवाचार की भावना विकसित करने पर जोर दिया गया।

समन्वयकों ने कहा कि उद्योग आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम भविष्य के इंजीनियरों को नई तकनीकों के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण हैं। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को वास्तविक औद्योगिक जरूरतों और तकनीकी चुनौतियों को समझने में मदद करते हैं। ईसीई और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों ने कार्यशाला में सक्रिय भागीदारी की और विशेषज्ञों के साथ संवाद कर अपने सवालों के जवाब प्राप्त किए। कार्यशाला का समापन संवादात्मक चर्चा के साथ हुआ। इस दौरान स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों को आगे बढ़ाने और हरित भविष्य के निर्माण के लिए शिक्षण संस्थानों तथा उद्योग जगत के बीच सहयोग को महत्वपूर्ण बताया गया। कार्यशाला ने विद्यार्थियों को सौर ऊर्जा के क्षेत्र में हो रहे तकनीकी बदलावों से परिचित कराने के साथ भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

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