Site icon Dainik Savera Times

स्वायत्तता से छेड़छाड़ पर बिगड़ेगी विश्वविद्यालय की शैक्षिक व्यवस्था- HPUTWA

शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ (HPUTWA) के आह्वान पर विश्वविद्यालय की स्वायत्तता के समर्थन में चल रहा ऐतिहासिक आंदोलन आज एक महीने से अधिक समय पूरा कर चुका है। विश्वविद्यालय परिसर में शिक्षकों, गैर-शिक्षक कर्मचारियों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों की भारी उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि स्वायत्तता की इस लड़ाई में पूरा विश्वविद्यालय समुदाय एकजुट है।

सभा में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि सरकार द्वारा विश्वविद्यालय की स्वायत्तता को खत्म करने के प्रयास से HPU की पूरी शैक्षिक व्यवस्था चरमरा जाएगी।

स्वायत्तता खत्म हुई तो विश्वविद्यालय नहीं कर पाएगा अपना कोई भी काम

आंदोलन को संबोधित करते हुए प्रोफेसर अजय अत्री ने कहा, “यह विधेयक विश्वविद्यालय की जड़ों पर सीधा हमला है। विश्वविद्यालय कोई सरकारी विभाग नहीं है, यह स्वतंत्र चिंतन, शोध और नवाचार का मंदिर है। स्वायत्तता खत्म होने के बाद विश्वविद्यालय अपना छोटा से छोटा शैक्षिक कार्य भी अपने स्तर पर नहीं करवा पाएगा। एक क्लास शुरू करने से लेकर एक कोर्स चलाने तक के लिए हर फाइल को सचिवालय ले जाना पड़ेगा। इससे न केवल शैक्षणिक गतिविधियां ठप होंगी, बल्कि विश्वविद्यालय की पहचान भी खत्म हो जाएगी।”

प्रोफेसर शिव कुमार डोगरा ने कहा कि इसका सबसे सीधा और घातक प्रभाव शैक्षणिक गतिविधियों पर पड़ेगा। जब शिक्षकों की नियुक्ति, पदोन्नति, नए कोर्स, शोध प्रोजेक्ट, सेमिनार और परीक्षा परिणाम तक के लिए सरकार की मंजूरी अनिवार्य हो जाएगी, तो पूरे-पूरे सत्र लेट हो जाएंगे। शोध कार्य रुक जाएगा, छात्रों को डिग्री समय पर नहीं मिलेगी और उनका भविष्य अंधकार में चला जाएगा। यह उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को खत्म करने की सोची-समझी साजिश है।

डॉ. जोगिंदर सकलानी ने कहा कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता उसकी आत्मा है। इसे खत्म करना मतलब विश्वविद्यालय को पंगु बना देना है। सरकार को चाहिए कि वह विश्वविद्यालय को अपने राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल न करे।

डॉ. मीना ने कहा कि स्वायत्तता केवल अधिकार नहीं, बल्कि अकादमिक जिम्मेदारी है। विश्वविद्यालय की अकादमिक स्वतंत्रता, शोध की स्वतंत्रता और स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता ही उसे विश्वविद्यालय बनाती है। सरकार को समझना होगा कि जवाबदेही और पारदर्शिता का मतलब स्वायत्तता को कुचलना नहीं है। महिला शिक्षकों और शोधार्थियों के लिए यह स्वायत्तता और भी महत्वपूर्ण है।

HPUTWA अध्यक्ष प्रो. नितिन व्यास ने कहा कि एक महीने से अधिक समय से हम शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से सरकार को समझा रहे हैं। स्वायत्तता से छेड़छाड़ का मतलब है विश्वविद्यालय की शैक्षिक व्यवस्था को तबाह करना। HPUTWA किसी भी कीमत पर इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। यह लड़ाई केवल शिक्षकों की नहीं, बल्कि हर छात्र और हिमाचल के भविष्य की लड़ाई है।

अंत में HPUTWA सचिव डॉ. अंकुश भारद्वाज ने सभी शिक्षकों, कर्मचारियों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों का आभार जताते हुए कहा, “जब तक सरकार इस काले विधेयक को वापस नहीं लेती और विश्वविद्यालय समुदाय के साथ संवाद नहीं करती, तब तक यह आंदोलन इसी ताकत और एकजुटता के साथ जारी रहेगा। हम अपना कोई भी शैक्षिक काम सरकार की अनुमति से नहीं होने देंगे।

📍 Location: शिमला (शिमला)

Exit mobile version