शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की स्वायत्तता, अकादमिक स्वतंत्रता एवं संस्थागत गरिमा की रक्षा तथा Career Advancement Scheme (CAS) को बहाल करने की मांग को लेकर हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ (HPUTWA) का ‘विश्वविद्यालय बचाओ अभियान’ 15वें दिन भी जारी रहा।
बुधवार को कुलपति कार्यालय के बाहर दोपहर 12:45 बजे शिक्षकों ने रोष प्रदर्शन किया। इस दौरान शिक्षकों ने विश्वविद्यालय की स्वायत्तता तथा CAS की बहाली की मांग को लेकर अपनी आवाज बुलंद की। इसी क्रम में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केंद्र, धर्मशाला में भी शिक्षकों ने प्रदर्शन कर अभियान के प्रति अपनी एकजुटता व्यक्त की।
शिमला में आयोजित प्रदर्शन को डॉ. तनुज, डॉ. प्रियंका, डॉ. कंवलजीत, प्रो. दूनी चंद, HPUTWA अध्यक्ष प्रो. नितिन व्यास तथा HPUTWA संयुक्त सचिव डॉ. अंजली शर्मा ने संबोधित किया। डॉ. तनुज ने कहा कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता उसकी अकादमिक पहचान और स्वतंत्र कार्यप्रणाली का मूल आधार है। विश्वविद्यालय से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय निर्धारित संस्थागत प्रक्रियाओं और वैधानिक निकायों के माध्यम से लिए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता को मजबूत किए बिना उच्च शिक्षा और शोध की गुणवत्ता को आगे बढ़ाना चुनौतीपूर्ण होगा।
डॉ. प्रियंका ने कहा कि विश्वविद्यालय की प्रगति में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका है और उनके अकादमिक विकास के लिए पारदर्शी एवं प्रभावी करियर प्रगति व्यवस्था आवश्यक है। उन्होंने CAS की बहाली की मांग उठाते हुए कहा कि शिक्षकों के अकादमिक विकास और सेवा-संबंधी विषयों का उचित एवं संस्थागत समाधान किया जाना चाहिए।
डॉ. कंवलजीत ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय वर्षों की शैक्षणिक, शोध और अकादमिक परंपराओं से निर्मित एक महत्वपूर्ण संस्थान है। इसकी स्वतंत्र पहचान और संस्थागत गरिमा को बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों का समाधान संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना चाहिए।
प्रो. दूनी चंद ने अपने संबोधन में विश्वविद्यालय की स्वायत्तता से जुड़े विभिन्न Acts, वैधानिक प्रावधानों और संस्थागत प्रक्रियाओं का उल्लेख करते हुए इस विषय से संबंधित कई महत्वपूर्ण तथ्य शिक्षकों के समक्ष रखे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता केवल एक प्रशासनिक विषय नहीं है, बल्कि यह विश्वविद्यालय की अकादमिक स्वतंत्रता और वैधानिक अधिकारों से सीधे जुड़ी हुई है। उन्होंने विभिन्न प्रावधानों और तथ्यों के माध्यम से विषय के महत्वपूर्ण पहलुओं को स्पष्ट करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय से संबंधित निर्णय निर्धारित वैधानिक एवं संस्थागत प्रक्रियाओं के अनुरूप ही लिए जाने चाहिए।
HPUTWA अध्यक्ष प्रो. नितिन व्यास ने कहा
HPUTWA अध्यक्ष प्रो. नितिन व्यास ने कहा कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता और CAS की बहाली शिक्षकों की प्रमुख मांगें हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षकों का संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की स्वतंत्र, लोकतांत्रिक एवं गरिमापूर्ण कार्यप्रणाली की रक्षा के लिए है। उन्होंने कहा कि शिक्षक जवाबदेही और पारदर्शिता के पक्षधर हैं, लेकिन जवाबदेही के नाम पर विश्वविद्यालय की स्वायत्तता को कमजोर नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि HPUTWA शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को उठाता रहेगा।
धर्मशाला क्षेत्रीय केंद्र में भी प्रदर्शन
HPUTWA के आह्वान पर हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केंद्र धर्मशाला में भी शिक्षकों ने प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने विश्वविद्यालय की स्वायत्तता, अकादमिक स्वतंत्रता और CAS की बहाली की मांग को लेकर अपना समर्थन व्यक्त किया। इस प्रदर्शन के माध्यम से क्षेत्रीय केंद्र के शिक्षकों ने भी शिमला में चल रहे अभियान के साथ अपनी एकजुटता प्रकट की। HPUTWA ने कहा कि ‘विश्वविद्यालय बचाओ अभियान’ विश्वविद्यालय की स्वायत्तता, अकादमिक स्वतंत्रता, CAS की बहाली, लोकतांत्रिक मूल्यों और संस्थागत गरिमा की रक्षा के लिए जारी है। 15वें दिन शिमला के साथ-साथ धर्मशाला में भी शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी ने अभियान के प्रति उनकी एकजुटता को सामने रखा।
📍 Location: शिमला (शिमला)