शिमला। भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (आईआईएएस), राष्ट्रपति निवास, शिमला में आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संस्थान के फेलोज, अध्येताओं, अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने महात्मा गांधी के जीवन, विचारों और उनके द्वारा स्थापित सत्य एवं अहिंसा के आदर्शों को स्मरण किया।
कार्यक्रम की शुरुआत महात्मा गांधी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। इसके पश्चात् संस्थान परिवार की बालिका सुश्री अश्नूर कौर ने महात्मा गांधी के जीवन एवं विचारों से प्रेरित कविता का पाठ किया। उनकी प्रस्तुति ने कार्यक्रम को भावपूर्ण स्वर प्रदान किया और गांधी जी के विचारों की मानवीय एवं नैतिक प्रासंगिकता को रेखांकित किया।
इस अवसर पर भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान के फेलो प्रो. देवी प्रसाद तिवारी ने “महात्मा गांधी और समकालीन संदर्भ” विषय पर विशेष व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने गांधी के व्यक्तित्व, चिंतन और सामाजिक दृष्टि के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालते हुए उनके विचारों की वर्तमान समय में प्रासंगिकता को रेखांकित किया। उन्होंने सत्य, अहिंसा, नैतिकता, सामाजिक समरसता तथा मानवीय गरिमा जैसे मूल्यों के संदर्भ में गांधी के विचारों को समझने की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रो. तिवारी ने गांधी के विचारों को केवल ऐतिहासिक संदर्भ तक सीमित न मानते हुए उन्हें निरंतर आत्ममंथन और सामाजिक संवाद का आधार बताया। उन्होंने गांधी के जीवन और कार्यों से जुड़े विभिन्न पक्षों के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि उनके लिए साध्य के साथ-साथ साधनों की शुचिता भी अत्यंत महत्वपूर्ण थी। गांधी का चिंतन व्यक्ति, समाज और सार्वजनिक जीवन में नैतिक उत्तरदायित्व की भावना को सुदृढ़ करने पर केंद्रित रहा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान के निदेशक प्रो. हिमांशु कुमार चतुर्वेदी ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने महात्मा गांधी को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए उनके जीवन और विचारों की व्यापक प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गांधी का व्यक्तित्व भारतीय और वैश्विक चिंतन परंपरा में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है तथा सत्य और अहिंसा के उनके प्रयोगों ने सामाजिक एवं राजनीतिक विचार-विमर्श को नई दिशा प्रदान की।
प्रो. चतुर्वेदी ने गांधी के विचारों को वर्तमान सामाजिक एवं बौद्धिक परिवेश के संदर्भ में समझने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि गांधी जयंती केवल एक महान व्यक्तित्व के स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि सत्य, अहिंसा, आत्मानुशासन, सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवीय संवेदना जैसे मूल्यों पर पुनर्विचार का अवसर भी है।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. राजीव कुमार मिश्रा, पुस्तकालयाध्यक्ष एवं अकादमिक संसाधन अधिकारी, भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान द्वारा किया गया। उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए गांधी जयंती के महत्व को रेखांकित किया तथा वक्ताओं एवं उपस्थित सदस्यों का कार्यक्रम से जुड़ने के लिए आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में यह विचार प्रमुखता से उभरकर आया कि महात्मा गांधी का चिंतन केवल उनके समय की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों तक सीमित नहीं है, बल्कि सत्य, अहिंसा, नैतिक आचरण और मानवीय गरिमा जैसे मूल्यों के कारण वह आज भी विचार और विमर्श का महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है। गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम इन मूल्यों पर संवाद और आत्मचिंतन का अवसर बना।
इस अवसर पर शिक्षा मंत्रालय से प्राप्त निर्देशों के क्रम में उपस्थित सभी सदस्यों को स्वच्छता की शपथ भी दिलाई गई। शपथ के माध्यम से स्वच्छता के प्रति व्यक्तिगत एवं सामूहिक जिम्मेदारी निभाने, स्वच्छ एवं स्वस्थ परिवेश बनाए रखने तथा स्वच्छता को दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम में संस्थान के राष्ट्रीय अध्येताओं, टैगोर अध्येताओं, फेलोज, आईयूसी एसोसिएट्स तथा अधिकारियों एवं कर्मचारियों सहित संस्थान परिवार के अन्य सदस्यों ने सहभागिता की।
📍 Location: शिमला (शिमला)

