Site icon Dainik Savera Times

भारत के 20 प्रतिशत से अधिक कॉलेज विद्यार्थियों ने शुरू किया अपना व्यवसाय, वैश्विक औसत के बराबर: आईईटी मंडी की रिपोर्ट

मंडी: भारत के पांच में से एक से अधिक कॉलेज विद्यार्थी (22 प्रतिशत) पहले ही अपना व्यवसाय शुरू कर चुके हैं। यह आँकड़ा वैश्विक औसत (23 प्रतिशत) के लगभग बराबर है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी द्वारा बेंगलुरु स्थित रेवा विश्वविद्यालय के सहयोग से जारी विद्यार्थी उद्यमिता संबंधी राष्ट्रीय सर्वेक्षण रिपोर्ट 2025 में यह जानकारी सामने आई है।

देश के 34 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 1,200 से अधिक उच्च शिक्षण संस्थानों के 25,783 विद्यार्थियों पर किए गए इस सर्वेक्षण के अनुसार, भारत के प्रत्येक 100 में से 43 विद्यार्थी अपना व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं। यह आँकड़ा भी वैश्विक औसत के समान है। अपना व्यवसाय शुरू करने वाले विद्यार्थियों में से 35.5 प्रतिशत को पहले से ही नियमित बिक्री से आय हो रही है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह आँकड़ा 33 प्रतिशत है।

कॉलेज के बाद तुरंत उद्यम शुरू करने की इच्छा बढ़ी

रिपोर्ट के अनुसार, अब अधिक विद्यार्थी पढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद अपना व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं। वर्ष 2023 के सर्वेक्षण में जहां 14 प्रतिशत विद्यार्थी पढ़ाई पूरी करने के बाद तुरंत अपना व्यवसाय शुरू करना चाहते थे, वहीं वर्ष 2025 में यह आँकड़ा बढ़कर 16.2 प्रतिशत हो गया। इसके विपरीत, पढ़ाई पूरी करने के बाद सरकारी नौकरी पाने की इच्छा रखने वाले विद्यार्थियों का अनुपात 12.7 प्रतिशत से घटकर 10.1 प्रतिशत रह गया। इसी अवधि में बड़ी कंपनियों में नौकरी करने की इच्छा रखने वाले विद्यार्थियों का अनुपात भी 31.3 प्रतिशत से घटकर 27.4 प्रतिशत हो गया।

भारत के विद्यार्थी उद्यमी तेजी से अपने विचारों को व्यवसाय में बदल रहे हैं और असफलता के बाद दोबारा प्रयास करने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं। नियमित बिक्री करने वाले विद्यार्थी उद्यमों में से 31 प्रतिशत की स्थापना अकेले वर्ष 2025 में हुई, जबकि वैश्विक स्तर पर यह आँकड़ा 18 प्रतिशत है। इन उद्यमियों में से 41 प्रतिशत ऐसे हैं, जिन्होंने पहले अपना कोई व्यवसाय बंद करने के बाद दोबारा उद्यम शुरू किया। वैश्विक स्तर पर ऐसे उद्यमियों का अनुपात 33 प्रतिशत है। वहीं, भारत के 42 प्रतिशत विद्यार्थी उद्यमी दो या उससे अधिक व्यवसाय संचालित कर रहे हैं, जबकि वैश्विक औसत 25 प्रतिशत है।

आईआईटी मंडी के प्रबंधन अध्ययन विद्यालय में सहायक प्राध्यापक तथा विद्यार्थी उद्यमिता संबंधी वैश्विक सर्वेक्षण की भारतीय इकाई के प्रतिनिधि एवं रिपोर्ट के प्रमुख लेखक डॉ. पूरन सिंह ने कहा, “भारत के विद्यार्थी दुनिया के अन्य देशों के विद्यार्थियों की तरह ही महत्वाकांक्षी हैं। जो विद्यार्थी उद्यम शुरू कर रहे हैं, वे ऐसे वास्तविक व्यवसाय खड़े कर रहे हैं, जिनमें पहले से लोगों को रोजगार मिल रहा है। पाठ्यक्रम, विशेष उद्यमिता कार्यक्रम और परिसर में स्थापित उद्यम संवर्धन केंद्र स्पष्ट रूप से सकारात्मक भूमिका निभा रहे हैं। अब आवश्यकता इस बात की है कि विद्यार्थियों को अधिक से अधिक सफल उद्यमियों से जुड़ने के अवसर मिलें और उन्हें शुरुआती स्तर पर ही अपना उद्यम शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। हमें यह भी मापना चाहिए कि कितने विद्यार्थी केवल नया व्यवसाय शुरू करने की इच्छा व्यक्त करने के बजाय वास्तव में अपना उद्यम शुरू कर रहे हैं।”

रिपोर्ट के अनुसार, विद्यार्थी उद्यमियों के बीच सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल क्षेत्र में व्यवसाय शुरू करने की योजना सबसे लोकप्रिय है। हालाँकि, वर्तमान में संचालित विद्यार्थी व्यवसायों में से केवल लगभग 10 प्रतिशत डिजिटल क्षेत्र से जुड़े हैं।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि जिन विद्यार्थियों के रिश्तेदारों, मित्रों, सहपाठियों या शिक्षकों में कोई उद्यमी है, उनके स्वयं का उद्यम शुरू करने की संभावना अन्य विद्यार्थियों की तुलना में तीन गुना अधिक है।

“हम विद्यार्थी उद्यमियों को कैसे तैयार करें?” शीर्षक वाली यह रिपोर्ट 9 अक्टूबर, 2026 को मोहाली में आयोजित भारतीय प्रबंधन विद्यालय व्यवसाय सम्मेलन 2026 के दौरान जारी की गई थी। रिपोर्ट के लेखक डॉ. पूरन सिंह और प्रेरक शर्मा हैं। सर्वेक्षण सितंबर से दिसंबर 2025 के बीच किया गया था, जिसमें बेंगलुरु स्थित रेवा विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय साझेदार के रूप में सहयोग किया। यह सर्वेक्षण विद्यार्थी उद्यमिता पर केंद्रित विश्व की सबसे बड़ी शोध परियोजनाओं में से एक का हिस्सा है।

उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए कहाँ अधिक सहयोग की आवश्यकता है?

रिपोर्ट यह भी बताती है कि विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षण संस्थान विद्यार्थियों को उद्यम शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए किन क्षेत्रों में अधिक सहयोग प्रदान कर सकते हैं। भारत के आधे विद्यार्थियों के माता-पिता के अलावा उनके परिचितों में कोई उद्यमी नहीं है, जबकि वैश्विक स्तर पर ऐसे विद्यार्थियों का अनुपात लगभग एक-तिहाई है। इसके अतिरिक्त, जो विद्यार्थी अभी अपने उद्यम को विकसित करने के चरण में हैं, उनमें से केवल 10 प्रतिशत ने पहली बिक्री की है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह आँकड़ा 23 प्रतिशत है।

रिपोर्ट के अनुसार, व्यवसाय शुरू करने की इच्छा रखने वाली महिलाओं और पुरुषों का अनुपात लगभग समान है। हालाँकि, उद्यम शुरू करने की इच्छा रखने वाली महिलाओं में से 45 प्रतिशत ने वास्तव में उद्यम शुरू किया है, जबकि पुरुषों में यह आँकड़ा 53 प्रतिशत है।
विद्यार्थी उद्यमिता संबंधी राष्ट्रीय सर्वेक्षण के वर्ष 2025 के संस्करण की राष्ट्रीय साझेदार रेवा विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. पी. श्यामा राजू ने कहा, “विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी अब केवल विद्यार्थियों को नौकरी के लिए तैयार करना नहीं रह गई है। उन्हें उद्यमिता के लिए भी तैयार करना आवश्यक है, ताकि वे केवल रोजगार पाने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाले बन सकें।”

आईआईटी मंडी के प्रबंधन अध्ययन विद्यालय के अध्यक्ष प्रो. अंजन कुमार स्वैन ने कहा, “विद्यार्थी उद्यमिता हमारे विद्यालय की प्रबंधन शिक्षा संबंधी सोच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। हम चाहते हैं कि हमारे विद्यार्थी केवल व्यवसायों और संगठनों का प्रबंधन करना ही न सीखें, बल्कि स्वयं के उद्यम और संगठन भी स्थापित करें। हमें गर्व है कि विद्यार्थी उद्यमिता पर आधारित इस राष्ट्रीय अध्ययन का नेतृत्व हमारे विद्यालय द्वारा किया जा रहा है। हम इसके निष्कर्षों का उपयोग अपने शैक्षणिक कार्यक्रमों को और बेहतर बनाने के लिए करेंगे।”

आईआईटी मंडी में प्रायोजित अनुसंधान एवं औद्योगिक परामर्श के अधिष्ठाता प्रो. श्याम कुमार मसकापल्ली ने कहा, “उद्यमिता का अर्थ समाधान तैयार करना, नए अवसर पैदा करना और समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालना है। आईआईटी मंडी में हम ऐसे उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध हैं, जहाँ विद्यार्थियों को केवल अवसर तलाशने ही नहीं, बल्कि स्वयं अवसर सृजित करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाता है।”

रिपोर्ट की प्रमुख सिफारिशें

रिपोर्ट में विश्वविद्यालयों, उद्यम संवर्धन केंद्रों और सरकारों को निम्नलिखित कदम उठाने की सिफारिश की गई है:

केवल इच्छा नहीं, बल्कि उद्यम शुरू करने की वास्तविक प्रगति मापें

यह आकलन किया जाए कि व्यवसाय शुरू करने की इच्छा रखने वाले कितने विद्यार्थी वास्तव में अपना उद्यम स्थापित करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में प्रत्येक 100 इच्छुक विद्यार्थियों में से लगभग 51 विद्यार्थी अपना उद्यम शुरू कर पाते हैं।

विद्यार्थियों को सफल उद्यमियों से जोड़ें

पूर्व विद्यार्थियों में से उद्यमियों, उद्यमिता से जुड़े शिक्षकों और विद्यार्थी उद्यमियों को कक्षाओं, छात्रावासों और परिसर में आयोजित गतिविधियों का हिस्सा बनाया जाए, ताकि विद्यार्थियों को वास्तविक अनुभवों से सीखने का अवसर मिले।

केवल योजनाएं बनाने के बजाय पहला ग्राहक हासिल करने पर जोर दें

व्यवसाय योजना प्रतियोगिताओं के साथ-साथ पहली बिक्री करने, व्यवसाय का पंजीकरण कराने और प्रारंभिक नमूना उत्पाद विकसित करने जैसे व्यावहारिक प्रयासों को प्रोत्साहित और पुरस्कृत किया जाए।

रिपोर्ट की पूरी प्रति निम्नलिखित वेबसाइटों पर उपलब्ध है:

– https://guesssindia.in
– https://tlabindia.com

विद्यार्थी उद्यमिता संबंधी वैश्विक सर्वेक्षण और इसकी भारतीय इकाई के बारे में

विद्यार्थी उद्यमिता संबंधी वैश्विक सर्वेक्षण विश्व की सबसे बड़ी शोध परियोजनाओं में से एक है, जो विद्यार्थियों की उद्यमिता संबंधी सोच, आकांक्षाओं और व्यावसायिक गतिविधियों का अध्ययन करती है। इसकी शुरुआत वर्ष 2003 में स्विट्जरलैंड के सेंट गैलेन विश्वविद्यालय में हुई थी। इसका संचालन सेंट गैलेन विश्वविद्यालय और बर्न विश्वविद्यालय संयुक्त रूप से करते हैं। वर्ष 2025 के सर्वेक्षण में 66 देशों के विद्यार्थियों ने भाग लिया।

इस परियोजना की आधिकारिक भारतीय इकाई का नेतृत्व आईआईटी मंडी के प्रबंधन अध्ययन विद्यालय द्वारा किया जाता है। इस पहल से 600 से अधिक विद्यार्थी परिसर प्रतिनिधि जुड़े हुए हैं। रेवा विश्वविद्यालय, बेंगलुरु, वर्ष 2025 के सर्वेक्षण की राष्ट्रीय साझेदार है। वर्ष 2025 की रिपोर्ट डॉ. पूरन सिंह और प्रेरक शर्मा द्वारा तैयार की गई है।

📍 Location: Mandi (Mandi)

Exit mobile version