कुल्लू: जिला कुल्लू के मुख्यालय ढालपुर मैदान में चल रहे सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव का मंगलवार को समापन हो गया। दोपहर बाद भगवान रघुनाथ की रथ यात्रा निकाली गई और हजारों लोगों के द्वारा इस रथ यात्रा में भाग लिया गया। भगवान रघुनाथ का रथ पहले लंका बेकर की ओर ले जाया गया। जहां पर पुरानी देव परंपराओं का पालन किया गया। उसके बाद हजारों लोगों के द्वारा भगवान रघुनाथ खींचकर रथ मैदान पहुंचाया गया। जहां से भगवान रघुनाथ को पालकी में बैठकर रघुनाथ मंदिर ले जाया गया। ऐसे में 7 दिनों के बाद भगवान रघुनाथ एक बार फिर से अपने मंदिर में विराजमान हो गए हैं। वहीं अब अगले साल ही ढालपुर मैदान में देवी देवताओं का भव्य मिलन होगा और ढालपुर मैदान फिर से एक साल के लिए अब सूना पड़ गया है।
मंगलवार को ढालपुर मैदान में हजारों की भीड़ भगवान रघुनाथ के रथ को खींचते हुए लंका बेकर आई। ऐसे में माता हिडिंबा सहित अन्य देवी देवता भी लंका दहन की रथ यात्रा में विशेष रूप से शामिल हुए और लंका बेकार में अष्टांग बलि की प्रक्रिया को भी पूरा किया गया। इसके बाद माता हिडिंबा सबसे पहले वापस पीछे की ओर लौट आई और उसके बाद भगवान रघुनाथ का रथ भी ढालपुर के रथ मैदान में पहुंचा। जहां से भगवान रघुनाथ, माता सीता और हनुमान की मूर्ति को पालकी में सजाया गया और ढोल नगाड़ों की थाप पर उन्हें रघुनाथपुर के मंदिर में ले जाया गया।
वहीं माता हिडिंबा कुल्लू दशहरा में सात दिन तक अपने अस्थायी शिविर में ही रहती हैं और लंका दहन के बाद ही अपने देवालय लौटती हैं। ये परंपरा सालों से चली आ रही है। लंका दहन के लिए होने वाली रथयात्रा में माता का रथ सबसे आगे चलता है। आगे चलकर माता हिडिंबा पूरा देव महाकुंभ को बखूबी संपन्न करती हैं। लंका दहन के समय माता हिडिंबा को अष्टांग बलि दी जाती है। अष्टांग बलि के समय माता हिडिंबा का गूर, पुजारी, घंटी, धड़च्छ के साथ जाते हैं, जबकि माता का रथ कुछ दूरी पर रहता है। लेकिन जैसे ही बलि की प्रथा पूरी हो जाती है। माता का रथ स्वतः ही पीछे मुड़कर देवालय की ओर लौट जाता है। इसके साथ ही दशहरा उत्सव का समापन हो जाता है।
वहीं अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव संपन्न होने के साथ ही ढालपुर में आए सैकड़ों देवी देवता भी अपने-अपने अस्थाई शिविर को छोड़कर अपने-अपने देवालय की ओर लौट रहे हैं। ऐसे में सभी देवी देवताओं ने मंगलवार को भी आपस में देव मिलन की प्रक्रिया को पूरा किया और अगले साल आने का वादा कर वापस अपने मंदिरों की ओर लौट गए। देवताओं के वापस लौटने से अब ढालपुर का मैदान भी सूना पड़ गया है। अगले साल ही फिर से दशहरा उत्सव में देवी देवताओं का महाकुंभ होगा और सैकड़ों देवी देवताओं के ढालपुर मैदान में दर्शन हो पाएंगे।
वही भगवान रघुनाथ की रथ यात्रा देखने पहुंचे श्रद्धालु अश्वनी महंत का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव एक ऐसा उत्सव है, जहां पर एक ही मैदान में जिला कुल्लू के विभिन्न इलाकों से आए देवी देवताओं के दर्शन होते हैं। ऐसे में भगवान रघुनाथ की रथ यात्रा के साथ यह दशहरा उत्सव अब संपन्न हो गया है। अगले साल फिर वह इसी मैदान में सभी देवी देवताओं के दर्शन करेंगे।
रथ यात्रा में शामिल सिद्धार्थ पुरोहित का कहना है कि भगवान रघुनाथ 7 दिनों तक ढालपुर में अपने अस्थाई शिविर में विराजमान रहे और अब लंका दहन के साथ ही वह अब अपने स्थाई मंदिर की ओर लौट गए हैं। लंका दहन की दिन भी हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान रघुनाथ का रथ खींचा और भगवान श्री राम का आशीर्वाद लिया।
भूपेंद्र वर्मा ने बताया कि लंका दहन के साथ ही अब भगवान रघुनाथ अपने देवालय में लौट गए है। ऐसे में हर साल वह दशहरा उत्सव के दौरान भगवान रघुनाथ को लाने से छोड़ने तक की यात्रा में शामिल रहते है। यह सभी श्रद्धालुओं के लिए बेहद भावुक शण रहता है।
📍 Location: Kullu (Kullu)

