Last Updated: October 3, 2026

Dainik Savera Times Logo

जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार को घेरा

October 3, 2026

जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार को घेरा Jairam Questions Job Trainee Policy : शिमला। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने हमीरपुर दौरे के दौरान सुक्खू सरकार पर न्यायालय में उसके फैसलों के बार-बार असंवैधानिक ठहराए जाने को लेकर निशाना साधा। बड़सर में विधायक इंद्रदत्त लखनपाल और पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात के बाद टिप्पर में आयोजित अल्पकालीन विस्तारक प्रशिक्षण वर्ग में उन्होंने मेडिकल अफसरों की भर्ती में जॉब ट्रेनी बनाए जाने के फैसले को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। शनिवार को वह टिप्पर में आयोजित ‘अल्पकालीन विस्तारक प्रशिक्षण वर्ग’ में वरिष्ठ पदाधिकारियों और पार्टी के सहयोगियों के साथ शामिल हुए। हमीरपुर से जारी बयान में उन्होंने सुक्खू सरकार के फैसलों के बार-बार न्यायालय में असंवैधानिक सिद्ध होने पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के द्वारा स्वयं को क़ानून का उच्चकोटि का जानकार और अध्ययनकर्ता बताते हैं, उनके मित्र मंडल और सलाहकारों की फ़ौज के बाद भी बार-बार न्यायालय में सरकार की फ़ज़ीहत क्यों होती है? उनके बनाए नियम, क़ानून, नीतियाँ और लिए गए फ़ैसले बार-बार असंवैधानिक क्यों हो जाते हैं? उनकी मंशा क्या है? व्यवस्था परिवर्तन का नारा देकर मुख्यमंत्री असंवैधानिक नियमों, नीतियों, क़ानून और फैसलों का रिकॉर्ड बना रहे हैं। उन्हें समझना चाहिए कि न्यायालय में मुख्यमंत्री के जनसभाओं वाले झूठ नहीं चल सकते हैं। उन्होंने उच्च न्यायालय द्वारा मेडिकल अफसरों की भर्ती में जॉब ट्रेनी बनाए जाने के फैसले को असंवैधानिक बताते हुए रद्द करने का स्वागत किया। जयराम ठाकुर ने कहा कि बार-बार सरकार की फ़ज़ीहत से वह साबित क्या करना चाहते हैं? यदि उन्हें क़ानून की जानकारी नहीं है तो वह वास्तविक क़ानूनविदों की सुनते क्यों नहीं? इससे कांग्रेसी मित्रों की वह बात साफ़ हो जाती है कि मुख्यमंत्री किसी की नहीं, सिर्फ़ अपनी सुनते हैं। अगर अपने मित्रों की नहीं सुननी तो हमारी भी सुन लेते, तो भी इस तरह फ़ज़ीहत नहीं होती। जब-जब मुख्यमंत्री प्रतिशोध और वैमनस्य की भावना के साथ विधानसभा में असंगत क़ानून लेकर आए, भाजपा ने उन्हें साफ़ बता दिया कि यह क़ानून न्यायिक समीक्षा में क़ानून के सामने टिकेगा नहीं, इसलिए इसे वापस लेना विधानसभा की गरिमा के लिए भी ठीक रहेगा। लेकिन संख्याबल के गुमान और सरकार की ज़िद में सदन की मर्यादा गिरी। इसी तरह से जॉब ट्रेनी पॉलिसी के ख़िलाफ़ भाजपा ने आवाज़ उठाई। इसे युवाओं के भविष्य के विरोधी कदम बताया, लेकिन सरकार ने नहीं सुना। पहले से चल रही भर्ती प्रक्रिया में भर्ती हुए डॉक्टर्स को भी जब जॉब ट्रेनी बना दिया, तब भी भाजपा ने सवाल उठाए, ऐसा न करने का आग्रह किया, तब भी सत्ता के अहंकार में चूर मुख्यमंत्री को कुछ समझ नहीं आया। विडंबना यह है कि सुक्खू सरकार में ऐसे-ऐसे क़ानून बनाए गए, जो हास्यास्पद और संविधान की मूल भावना के ख़िलाफ़ नज़र आते हैं, लेकिन सुक्खू व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर संविधान और व्यवस्था की गरिमा तार-तार करते जा रहे हैं।

खबरें और भी हैं...

Copyright © 2025 Dainik Savera Times. All rights reserved.
ऐप खोलें