
शिमला: शिमला से जारी बयान में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि कैग की रिपोर्ट ने सुक्खू सरकार के न सिर्फ भ्रष्टाचार को संरक्षण देने वाले कारनामे उजागर किए हैं, बल्कि प्रदेश की गंभीर वित्तीय स्थिति भी सामने लाई है। फिस्कल डिसिप्लिन और फिस्कल प्रूडेंस जैसे भारी-भरकम शब्द बोलकर अपनी पीठ थपथपाने वाले मुख्यमंत्री की नाकामी की वजह से प्रदेश की वित्तीय व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और सरकार के हाथ से फिसल गई है।
उन्होंने कहा कि जो कैश बैलेंस इन्वेस्टमेंट अकाउंट कोरोना काल के दौरान भी पर्याप्त रहा, वह व्यवस्था परिवर्तन वाली सुक्खू सरकार में लगभग शून्य पर पहुँच गया है। कैग की रिपोर्ट साफ कहती है कि वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2022-23 तक कैश बैलेंस इन्वेस्टमेंट अकाउंट लगातार बढ़ता रहा। पूर्व की भाजपा सरकार के दौरान यह ₹3,645.18 करोड़ तक पहुँच गया था। लेकिन 2023-24 में इसमें 2,187.37 करोड़ रुपये और 2024-25 में 1,457.81 करोड़ रुपये की भारी गिरावट दर्ज की गई। इससे आने वाले वर्षों में प्रदेश की वित्तीय स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि बाकी आंकड़े और भी डराने वाले हैं। कैग की रिपोर्ट से साफ हुआ है कि सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे होने का दावा करने वाले मुख्यमंत्री साल के 44 प्रतिशत दिनों यानी 162 दिनों में निर्धारित न्यूनतम नकदी भी उपलब्ध नहीं करवा पाए। 12 महीनों में प्रदेश की ट्रेजरी 42 बार यानी औसतन हर दो महीने में सात बार ओवरड्राफ्ट हुई। इस दौरान ₹1,652.42 करोड़ रुपये वर्ष के अंत तक चुकाए नहीं गए। सिर्फ इस अल्पकालिक उधारी के लिए सरकार को 12.40 करोड़ रुपये का अतिरिक्त ब्याज देना पड़ा।
उन्होंने कहा कि 12 महीनों में 120 बार वेज़ एंड मीन्स एडवांस के माध्यम से कुल 11,276.83 करोड़ रुपये का ऋण आरबीआई से लिया गया। जनता की गाढ़ी कमाई और राज्य के खजाने को जिस तरह से लुटाया जा रहा है, वह किसी वित्तीय आपातकाल से कम नहीं है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इस हालत में सरकार बार-बार विकास की धनराशि को सरकार चलाने के कामों में खर्च कर रही है। विकास योजनाओं और केंद्र प्रायोजित योजनाओं का पैसा भी इधर-उधर खर्च हो रहा है, जिसकी वजह से योजनाएं अधर में लटक रही हैं। इन योजनाओं की अनुमानित लागत में लगातार इजाफा हो रहा है। पैसा अन्यत्र खर्च करने के कारण उपयोगिता प्रमाण-पत्र जमा नहीं हो रहे हैं। इस कारण आगामी बजट का आवंटन नहीं हो पा रहा है। योजनाएं पूरी नहीं हो रही हैं और उनका पैसा वापस करना पड़ रहा है। इससे प्रदेश का विकास ठप हो रहा है और प्रदेश की जनता संकट का सामना कर रही है।
उन्होंने कहा कि जो मुख्यमंत्री हर जगह चीख-चीखकर कहते हैं कि वर्ष 2027 तक हिमाचल आत्मनिर्भर और वर्ष 2032 तक देश का सबसे समृद्ध राज्य होगा, तो कृपया करके वह इसका फार्मूला प्रदेशवासियों को बता दें। सरकार उनकी है, इसलिए उस फार्मूले को लागू करें, जिससे प्रदेश का भला हो सके। जयराम ठाकुर ने सवाल उठाया कि कहीं ऐसा तो नहीं है कि यह दावा भी मुख्यमंत्री के बाकी झूठे दावों की तरह है, जिसके सहारे वह अपना समय काट रहे हैं?
📍 Location: शिमला (शिमला)
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