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SIR पर कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर राकेश जमवाल ने उठाए सवाल

Jamwal Questions Congress Protest Over SIR : शिमला। भाजपा प्रदेश मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक राकेश जमवाल ने SIR को लेकर कांग्रेस के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना राजनीतिक दलों का अधिकार है, लेकिन निर्वाचन विभाग के कार्यालय की दीवारों पर नारे लिखने और मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला फूंकने जैसी घटनाओं पर तथ्यों के आधार पर कार्रवाई होनी चाहिए। शिमला में 25 सितंबर को कांग्रेस ने SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के विरोध में प्रदर्शन किया था।

इसके अलावा उन्होंने कहा कि निर्वाचन विभाग के कार्यालय की दीवारों पर कथित तौर पर ‘वोट चोर’ लिखना और मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला फूंकना गंभीर सवाल खड़े करता है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कांग्रेस ने 25 सितंबर को शिमला में निर्वाचन विभाग के बाहर SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली के विरोध में प्रदर्शन किया तथा उन्हें पद से हटाने की मांग उठाई। जमवाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस स्वयं सत्ता में है।

ऐसे में सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं द्वारा निर्वाचन विभाग के कार्यालय को निशाना बनाए जाने से क्या संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है? उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह इस प्रकार सरकारी अथवा संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े परिसरों की दीवारों पर नारे लिखने को उचित राजनीतिक विरोध मानता है। उन्होंने मांग की कि यदि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या नियमों के उल्लंघन का मामला सामने आया है तो प्रशासन तथ्यों के आधार पर कानून के अनुसार कार्रवाई करे।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को SIR पर आपत्ति है तो उसके पास तथ्यों, दावों और आपत्तियों को निर्वाचन अधिकारियों के समक्ष रखने के वैधानिक रास्ते उपलब्ध हैं। चुनाव आयोग के आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार SIR का घोषित उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई पात्र नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रहे और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो। आयोग ने यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 324, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और संबंधित नियमों के तहत शुरू की है।

जमवाल ने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, संशोधन करने अथवा किसी अपात्र प्रविष्टि पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए चुनाव आयोग ने निर्धारित प्रक्रियाएं उपलब्ध कराई हैं। आयोग की जानकारी के अनुसार मतदाता पंजीकरण, संशोधन और आपत्तियों के लिए औपचारिक व्यवस्था मौजूद है तथा संबंधित निर्वाचन अधिकारियों के निर्णयों के विरुद्ध अपील का प्रावधान भी है। उन्होंने कहा कि “कांग्रेस को बताना चाहिए कि SIR में उसकी ठोस आपत्ति किस नियम, किस प्रक्रिया और किस तथ्य पर है। यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाया गया है तो उसका विवरण निर्वाचन आयोग के समक्ष रखा जाए।

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