शिमला (हिमाचल प्रदेश): हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने गुरुवार को श्रम और रोजगार विभाग को विदेशों में रोजगार के अवसर तलाशने वाले युवाओं को सशक्त बनाने के लिए एक समर्पित वेबसाइट और मोबाइल एप्लिकेशन विकसित करने के निर्देश दिए।
यह डिजिटल प्लेटफॉर्म अभ्यर्थियों पर व्यापक डेटा संकलित करेगा, जिससे बेहतर पारदर्शिता, पहुंच और सुरक्षा सुनिश्चित होगी तथा सुरक्षित विदेशी नौकरी के अवसर उपलब्ध होंगे।
विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री सुखू ने कहा, “हिमाचल प्रदेश के युवा मेहनती, ईमानदार और सक्षम हैं। राज्य सरकार उन्हें विदेशों में अच्छे वेतन वाली नौकरियां दिलाने और संभावित शोषण से बचाने के लिए प्रतिबद्ध है।”
सुखू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम (एचपीएसईडीसी) को पंजीकृत भर्ती एजेंसी के रूप में लाइसेंस प्राप्त हो गया है। उन्होंने एचपीएसईडीसी को निर्देश दिया कि वह अंतरराष्ट्रीय रोजगार बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप राज्य के युवाओं के कौशल विकास को बढ़ाने के लिए प्रमाणित प्रशिक्षण एजेंसियों के साथ सहयोग करे।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ष हिमाचल प्रदेश से लगभग 10,000 युवा रोजगार की तलाश में विदेश जाते हैं, जबकि अन्य 5,000 उच्च शिक्षा प्राप्त करने जाते हैं।
विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री ने कहा, “हालांकि, सटीक जानकारी और उचित मार्गदर्शन तक सीमित पहुंच के कारण, ये संख्याएं अपनी क्षमता से कम हैं। 2023-24 में, विदेशों में काम करने वाले हिमाचलियों ने विदेशों से कुल 2,030 करोड़ रुपये भेजे, जो राष्ट्रीय प्रेषण आंकड़ों का लगभग 0.2 प्रतिशत है, जो राज्य की अपेक्षाकृत छोटी आबादी को देखते हुए एक महत्वपूर्ण योगदान है।”
सीएम सुखू ने कहा कि विदेशों में नर्स, वेटर, हेल्थकेयर वर्कर, क्लर्क, ड्राइवर (लाइट और हैवी ड्यूटी), मशीन ऑपरेटर, सिक्योरिटी गार्ड, इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर, कारपेंटर, मेसन, वेल्डर और मैकेनिक जैसे पेशेवरों की बहुत मांग है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हिमाचल प्रदेश के कुशल युवा इन व्यवसायों में उपलब्ध हैं और एचपीएसईडीसी सक्रिय रूप से उनके विदेशों में प्लेसमेंट की सुविधा प्रदान करेगा।
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने श्रम एवं रोजगार विभाग को निर्देश दिया कि वे युवाओं को विदेश में रोजगार के सुरक्षित और वैध रास्तों के बारे में जानकारी देने के लिए जागरूकता अभियान शुरू करें तथा उन्हें केवल पंजीकृत भर्ती एजेंसियों के माध्यम से ही विदेश जाने के लिए प्रोत्साहित करें।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने विभाग को हिमाचल प्रदेश के लिए एक प्रभावी रणनीति तैयार करने के लिए केरल और तेलंगाना के विदेशी रोजगार मॉडल का अध्ययन करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि विशेष रूप से, देश में विदेशों में रोजगार की दर सबसे अधिक केरल में है, जहां प्रति 1,000 में से 57.94 व्यक्ति विदेश में काम कर रहे हैं, जबकि हिमाचल प्रदेश में यह संख्या प्रति 1,000 पर केवल 5.36 है।
मुख्यमंत्री ने विभाग को हिमाचली एनआरआई का डाटाबेस तैयार करने के भी निर्देश दिए।
बैठक में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, विधायक सुरेश कुमार, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान, हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष नरदेव कंवर, सचिव प्रियंका बसु एवं राखिल काहलों, श्रम आयुक्त वीरेंद्र शर्मा तथा विदेश मंत्रालय में प्रवासी संरक्षक यशु दीप सिंह भी उपस्थित थे।
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