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संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय (UNHQ) में उभरती तकनीकों और AI की वैश्विक चुनौतियों पर अहम विमर्श

शिमला: संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय (UNHQ), न्यूयॉर्क में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उभरती डिजिटल तकनीकों के वैश्विक प्रभावों, संभावित खतरों तथा इनके बहुपक्षीय नियमन को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में भारत की ओर से राज्यसभा सांसद प्रो. (डॉ.) सिकंदर कुमार ने संयुक्त राष्ट्र के ‘ऑफिस ऑफ डिजिटल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज’ के कार्यवाहक प्रमुख मिस्टर क्विंटिन चाउ-लैम्बर्ट (Mr. Quintin Chou-Lambert) के साथ विस्तृत और सार्थक द्विपक्षीय चर्चा की।

बैठक के दौरान प्रो. (डॉ.) सिकंदर कुमार ने आधुनिक तकनीकों के दोहरे चरित्र पर प्रकाश डालते हुए सचेत किया कि यदि AI को सख्त वैश्विक नीतिगत और नैतिक दायरे में नहीं बांधा गया, तो यह मानवता के अस्तित्व के लिए ‘परमाणु हथियारों’ जितना विनाशकारी साबित हो सकता है। उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया कि डीपफेक, दुष्प्रचार (Disinformation), साइबर युद्ध, स्वायत्त हथियार प्रणालियां (Lethal Autonomous Weapons) और बेलगाम डेटा दोहन आज लोकतांत्रिक संस्थाओं, राष्ट्रीय संप्रभुता और वैश्विक शांति के लिए सीधी चुनौती बन चुके हैं।

भारत का दृष्टिकोण: ‘मानव-केंद्रित और समावेशी AI’

चर्चा के दौरान प्रो. कुमार ने भारत का रणनीतिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए स्पष्ट किया कि भारत तकनीकी विकास का प्रबल समर्थक है, बशर्ते वह लोक-कल्याण के उद्देश्यों से प्रेरित हो। AI का उपयोग प्राथमिक रूप से स्वास्थ्य सेवाओं, उन्नत कृषि, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, जलवायु परिवर्तन से निपटने और गरीबी उन्मूलन जैसे सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति के लिए होना चाहिए।  भारत का मानना है कि AI के वैश्विक नियमन और मानकों के निर्धारण में केवल चुनिंदा विकसित देशों का एकाधिकार नहीं होना चाहिए। विकासशील और अल्पविकसित देशों (Global South) की प्राथमिकताओं और चिंताओं को नीति-निर्माण की मुख्यधारा में शामिल किया जाना अनिवार्य है।

‘AI for All’ की भारतीय नीति: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत डिजिटल समावेशन और ‘AI फॉर ऑल’ की जिस अवधारणा पर कार्य कर रहा है, वह पूरी दुनिया के लिए एक संतुलित मॉडल पेश करती है। तकनीक का उद्देश्य असमानता बढ़ाना नहीं, बल्कि उसे समाप्त करना होना चाहिए। प्रो. सिकंदर कुमार ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से आह्वान किया कि विश्व समुदाय को बिना किसी विलंब के एक बाध्यकारी और पारदर्शी अंतरराष्ट्रीय नियामक ढांचा तैयार करना चाहिए।

सख्त ऑडिटिंग मानक: उन्नत AI मॉडल्स की नियमित सुरक्षा जांच और एल्गोरिद्मिक जवाबदेही तय हो।

नैतिक आचार संहिता (Ethical Guidelines): मानवीय मूल्यों और डेटा गोपनीयता का पूर्ण संरक्षण सुनिश्चित किया जाए।

हथियारों में AI के उपयोग पर रोक: स्वायत्त युद्ध प्रणालियों पर अंतरराष्ट्रीय संधियों के माध्यम से कड़े प्रतिबंध लगाए जाएं।

UN प्रतिनिधि मिस्टर क्विंटिन चाउ-लैम्बर्ट ने भारत के इस संतुलित दृष्टिकोण की सराहना करते हुए स्वीकार किया कि डिजिटल भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए भारत जैसी प्रमुख वैश्विक शक्तियों की भूमिका निर्णायक है। प्रो. (डॉ.) सिकंदर कुमार ने कहा कि तकनीक जितनी तीव्र गति से आगे बढ़ रही है, अंतरराष्ट्रीय समुदाय को उतनी ही तत्परता और संवेदनशीलता से इसके खतरों पर साझा नीति बनानी होगी। AI को विनाश का साधन बनने से रोकने के लिए वैश्विक स्तर पर सख्त नियमन और नैतिक आचार संहिता आज समय की सबसे बड़ी मांग है।

📍 Location: शिमला (शिमला)

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