Kishau Project Triggers BJP-Congress Credit War : शिमला। किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच श्रेय लेने की राजनीति तेज हो गई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू पर परियोजना के समझौते को लेकर तथ्यों को गलत ढंग से पेश करने का आरोप लगाया है।
उन्होंने कहा कि 15 सितंबर 2026 को छह राज्यों के बीच हुए समझौते में केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण वित्तीय भूमिका रही है। परियोजना की अनुमानित लागत ₹15,624 करोड़ है, जबकि जल घटक की करीब 90 फीसदी लागत केंद्र सरकार द्वारा वहन किए जाने की व्यवस्था है।
उन्होंने कहा कि किशाऊ बांध परियोजना का समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रयासों से संभव हुआ है। भाजपा इस परियोजना और समझौते का स्वागत करती है, लेकिन मुख्यमंत्री को इसके वास्तविक वित्तीय प्रावधानों और हिमाचल प्रदेश के दीर्घकालिक हितों की स्थिति जनता के सामने स्पष्ट करनी चाहिए। डॉ. बिंदल ने कहा कि आज प्रदेश में एक पुरानी कहावत चरितार्थ हो रही है, जिसमें संसाधन किसी और के होते हैं और श्रेय कोई दूसरा लेने का प्रयास करता है।
मुख्यमंत्री लगातार किशाऊ बांध परियोजना की उपलब्धियां गिना रहे हैं, लेकिन परियोजना के वास्तविक वित्तीय प्रावधानों और केंद्र सरकार के योगदान को सामने नहीं रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के आधार पर ही परियोजना की वास्तविक स्थिति प्रदेश की जनता के सामने रखना चाहते हैं। ₹15,624 करोड़ की परियोजना में केंद्र सरकार का सबसे बड़ा वित्तीय योगदान डॉ. बिंदल ने कहा कि किशाऊ बांध परियोजना की कुल अनुमानित लागत ₹15,624 करोड़ है।
इसमें जल घटक की लागत ₹12,096 करोड़ और विद्युत घटक की लागत ₹3,528 करोड़ निर्धारित की गई है। उन्होंने कहा कि जल घटक की ₹12,096 करोड़ की राशि केंद्र सरकार द्वारा वहन किए जाने की व्यवस्था इस परियोजना को आगे बढ़ाने का सबसे महत्वपूर्ण आधार है। डॉ. बिंदल ने बताया कि इस परियोजना की परिकल्पना ब्रिटिश काल में हुई थी। वर्ष 1944-45 में इसका प्रारंभिक सर्वेक्षण हुआ, वर्ष 1962 में उत्तर प्रदेश सरकार ने विस्तृत सर्वेक्षण करवाया और वर्ष 1964 में प्राथमिक रिपोर्ट तैयार हुई। इसके बावजूद यह परियोजना दशकों तक आगे नहीं बढ़ सकी।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 में भी परियोजना को लेकर बैठक हुई थी, लेकिन जल घटक की लागत के बंटवारे पर सहमति नहीं बन पाई। छह लाभार्थी राज्य इस बड़े वित्तीय बोझ को वहन करने के लिए तैयार नहीं थे। डॉ. बिंदल ने कहा कि वर्ष 2025 में केंद्र सरकार द्वारा जल घटक का खर्च वहन करने का सैद्धांतिक निर्णय परियोजना के लिए निर्णायक साबित हुआ। इसी के परिणामस्वरूप 15 सितंबर 2026 को छह राज्यों के बीच समझौता संभव हो पाया।

