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हिमाचल में कीवी बनेगा किसानों की आय बढ़ाने का नया विकल्प, सरकार दे रही 50% तक सब्सिडी

कुल्लूः हिमाचल प्रदेश में किसानों और बागवानों की आर्थिक बड़े इसके लिए सरकार के द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही है। ऐसे में हिमाचल के ऊंचाई वाले इलाकों में किसान सेब, जापानी फल, अनार सहित अन्य स्टोन फ्रूट की भी खेती कर रहे हैं। लेकिन अब मौसम में हो रहे बदलाव के चलते सेब का दायरा ऊपरी इलाकों की ओर खिसक रहा है। तो वही बार-बार बदल रहे मौसम से कई पेड़ों को भी नुकसान हो रहा है। ऐसे में अब किसान और बागबान सेब, अनार, जापानी फल के साथ-साथ कीवी फल की खेती कर भी उसे अपना विकल्प बन सकते हैं।

हिमाचल प्रदेश में सरकार के द्वारा कीवी फल को प्रोत्साहन देने के लिए की मुख्यमंत्री कीवी प्रोत्साहन योजना भी चलाई गई है। जिसमें बागवानों को एक हेक्टेयर में कीवी फसल के लिए 50% तक सब्सिडी भी दी जाती है। ऐसे में हिमाचल प्रदेश में किसानों और बागवानों की आय बढ़ सके। इसके लिए अब सरकार नए-नए फलों के उत्पादन की ओर भी किसानों को प्रेरित कर रही है।

जिला कुल्लू में भी उद्यान विभाग के द्वारा किसानों और बागवानों को कीवी की खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके लिए उद्यान विभाग की फल विकास परियोजना नर्सरी में कीवी के पौधे तैयार किया जा रहे हैं। बीते 3 सालों में यहां से 1500 कीवी के पौधे तैयार कर किसानों को बेचे जा चुके हैं और इस साल भी 1000 से अधिक कीवी के पौधे तैयार किया जा रहे हैं। उद्यान विभाग के द्वारा नर्सरी में पौधों की देखरेख की जा रही है और दिसंबर माह में यह पौधे बागवानों को बांटे जाएंगे। उद्यान विभाग की नर्सरी में बागवानों को एक 50 रुपए प्रति पौधे की कीमत पर दिया जाएगा। ऐसे में जिला कुल्लू के निचले इलाकों में भी किसान भी कीवी खेती की ओर अपना रुख दिख रहे हैं।

फल विकास परियोजना बजौरा में विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉक्टर रोशन आनंद ने बताया कि यहां पर 3 सालों में 1500 से अधिक कीवी के पौधे किसानों को बेचे गए हैं और इस साल भी 1000 से अधिक पौधे तैयार किया जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि दिसंबर में यह कीवी के पौधे बागवानों को बेचे जाएंगे और अनार और सेब की खेती के अलावा किसानों के लिए यह आय का अच्छा स्रोत साबित हो सकते हैं।

वहीं, उद्यान प्रसार अधिकारी तरुण ठाकुर ने बताया कि कीवी की खेती के लिए किसान और बागबान विभाग के अधिकारियों की भी सलाह ले सकते हैं। इसके लिए किसानों को अपने खेत में नवंबर माह में ही तैयारी करनी होगी और जनवरी, फरवरी माह में यह पौधा लगाना चाहिए। किसान और बागवानों को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि उन्हें पंजीकृत नर्सरी से ही बीमारी रहित पौधा लेना चाहिए। ताकि उनकी अच्छी फसल हो सके और किसानों तथा बागवानों को आर्थिक रूप से भी फायदा मिल सके।

📍 Location: कुल्लू (KULLU)

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