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आईआईएएस में ‘द आइडिया ऑफ भारत’ पर प्रो. शांतिश्री पंडित का व्याख्यान

Lecture on ‘The Idea of ​​Bharat’: शिमला। भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (आईआईएएस), राष्ट्रपति निवास, शिमला द्वारा आज एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया, जिसमें जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली की कुलपति प्रो शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित ने “The Idea of Bharat – IKS as an Alternative Narrative Architecture” विषय पर वर्चुअल माध्यम से व्याख्यान दिया। इस अवसर पर संस्थान के राष्ट्रीय फेलो, टैगोर फेलो, फेलो, तथा आईयूसी एसोसिएट्स ने बड़ी संख्या में सहभागिता की। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण सिस्को वेबेक्स तथा भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान के आधिकारिक फेसबुक पृष्ठ के माध्यम से भी किया गया, जिससे देशभर के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं एवं विद्यार्थियों ने भी इस व्याख्यान का लाभ उठाया।

भारतीय ज्ञान परंपरा की वैश्विक प्रासंगिकता पर मंथन

कार्यक्रम के प्रारम्भ में भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान के निदेशक प्रोफेसर हिमांशु कुमार चतुर्वेदी ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए मुख्य वक्ता प्रो शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित का परिचय कराया। उन्होंने अपने स्वागत वक्तव्य में भारतीय ज्ञान परंपरा पर गंभीर अकादमिक विमर्श की आवश्यकता तथा ऐसे व्याख्यानों के महत्व को रेखांकित किया। अपने व्याख्यान में प्रो शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित ने भारत की ज्ञान परंपरा (Indian Knowledge Systems) के विविध आयामों तथा समकालीन वैश्विक बौद्धिक विमर्श में उसकी प्रासंगिकता पर विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने भारतीय सभ्यता की ज्ञान-संपदा, दार्शनिक परंपराओं, सांस्कृतिक निरंतरता तथा भारत-केंद्रित वैचारिक दृष्टिकोण को एक वैकल्पिक विमर्श-ढाँचे के रूप में विकसित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। व्याख्यान में इस बात पर भी विचार व्यक्त किए गए कि भारतीय ज्ञान प्रणाली केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान एवं भविष्य की वैश्विक चुनौतियों के समाधान हेतु एक सशक्त बौद्धिक आधार प्रदान करने की क्षमता रखती है। भारतीय चिंतन की बहुलतावादी परंपरा, समग्र ज्ञान-दृष्टि तथा शिक्षा एवं अनुसंधान में भारतीय ज्ञान प्रणाली की उपयोगिता पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

संवाद सत्र में भारतीय ज्ञान प्रणाली पर सार्थक मंथन

व्याख्यान के उपरांत आयोजित संवाद सत्र में संस्थान के फेलो, एसोसिएट्स एवं शोधार्थियों ने भारतीय ज्ञान प्रणाली, उच्च शिक्षा, अनुसंधान तथा समकालीन बौद्धिक विमर्श से संबंधित विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका प्रो. पंडित ने विस्तारपूर्वक उत्तर दिया। कार्यक्रम का संचालन संस्थान के पुस्तकालयाध्यक्ष एवं अकादमिक संसाधन अधिकारी डॉ. राजीव कुमार मिश्रा द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए मुख्य वक्ता, निदेशक, प्रतिभागियों तथा आयोजन से जुड़े सभी व्यक्तियों के प्रति आभार व्यक्त किया। समापन अवसर पर अध्यक्षीय टिप्पणी देते हुए निदेशक प्रो. हिमांशु कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान में ऐसे व्याख्यान विभिन्न ज्ञान परंपराओं और समकालीन बौद्धिक विमर्श के बीच सार्थक संवाद को निरंतर प्रोत्साहित करते हैं तथा संस्थान की शैक्षणिक गतिविधियों को नई दिशा प्रदान करते हैं।
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