हिमाचल डेस्कः हिमाचल की वीरभूमि ने एक और गौरवपूर्ण अध्याय जोड़ा है। लेफ्टिनेंट आभा ने अपने बलिदानी पिता जीत सिंह और दादा कफ्फू राम के नक्शेकदम पर चलते हुए भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त किया है। बता दें 2003 में जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद हुए जीत सिंह को मरणोपरांत सेना मेडल से सम्मानित किया गया था। उस समय आभा महज ढाई वर्ष की थीं।
अबोध बालिका को तब पता न था कि तिरंगे में लिपटे पिता अब कभी गोद में नहीं उठाएंगे, लेकिन उसी दिन से उन्होंने सेना में जाने की ठान ली। प्रारंभिक शिक्षा क्रिसेंट पब्लिक स्कूल, बनूरी (पालमपुर) से और उच्च शिक्षा एनआईटी हमीरपुर से पूरी की। कॉलेज के दौरान एनसीसी यूनिट हमीरपुर में सीनियर अंडर आफिसर के रूप में नेतृत्व का परिचय दिया।
फिर आभा ने ऐशोआराम वाली कॉर्पोरेट नौकरी ठुकराकर पिता की विरासत चुनी। एसएससी टेक के माध्यम से चयनित होकर आफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी, गया में कठिन प्रशिक्षण पूरा किया और लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त किया। आभा ने परिवार और प्रदेश का मान बढ़ाया है।
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