Last Updated: October 18, 2026

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मिड डे मील वर्कर यूनियन ने 10 माह के वेतन को 12 महीनों में बांटने की अधिसूचना का किया विरोध

October 18, 2026

मिड डे मील वर्कर यूनियन ने 10 माह के वेतन को 12 महीनों में बांटने की अधिसूचना का किया विरोध

शिमला: मिड डे मील वर्कर यूनियन हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी की बैठक 18 अक्टूबर 2026 को शिमला में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता यूनियन के राज्य अध्यक्ष कॉमरेड संदीप ने की। बैठक में सीटू (CITU) हिमाचल प्रदेश के राज्य अध्यक्ष कॉमरेड विजेंद्र मेहरा तथा यूनियन प्रभारी कॉमरेड जगत राम विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक में मिड डे मील वर्कर्स की समस्याओं, लंबित मांगों तथा देश और प्रदेश की वर्तमान परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक को संबोधित करते हुए सीटू राज्य अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा और यूनियन प्रभारी जगत राम ने कहा कि देश में बेरोजगारी और महंगाई चरम पर पहुंच रही है। आम जनता के लिए परिवार का गुजारा करना मुश्किल होता जा रहा है। ऐसी परिस्थितियों में मेहनतकश वर्ग के सामने आजीविका का संकट गहराता जा रहा है। उन्होंने कहा कि मिड डे मील वर्कर्स सरकारी स्कूलों में बच्चों को भोजन उपलब्ध करवाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाती हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें बेहद कम मानदेय पर काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उनके वेतन में सम्मानजनक बढ़ोतरी नहीं की जा रही है और उनकी समस्याओं की लगातार अनदेखी की जा रही है।

10 माह के वेतन को 12 महीनों में बांटने की अधिसूचना का विरोध

बैठक में शिक्षा विभाग द्वारा मिड डे मील वर्कर्स के 10 माह के वेतन को 12 महीनों में बांटकर देने के संबंध में जारी अधिसूचना पर कड़ा विरोध जताया गया। यूनियन ने इस निर्णय को पूरी तरह गलत और वर्कर्स के हितों के खिलाफ बताया।

यूनियन नेताओं ने कहा कि मिड डे मील वर्कर्स को पहले ही बहुत कम मानदेय मिलता है। ऐसे में 10 माह के कुल वेतन को 12 महीनों में बांटकर देना उनके मासिक भुगतान को और कम कर देगा। इससे महंगाई के दौर में पहले से आर्थिक संकट का सामना कर रही हजारों महिलाओं की परेशानियां बढ़ेंगी। यूनियन ने स्पष्ट किया कि वेतन को 12 महीनों में बांटने के बजाय मिड डे मील वर्कर्स को 10 माह का पूरा निर्धारित वेतन प्रत्येक संबंधित महीने में दिया जाना चाहिए।

यूनियन ने शिक्षा विभाग से मांग की कि इस अधिसूचना को तत्काल वापस लिया जाए और मिड डे मील वर्कर्स को उनका 10 माह का पूरा वेतन हर महीने सुनिश्चित किया जाए। यूनियन ने चेतावनी दी कि यदि विभाग ने इस अधिसूचना को वापस नहीं लिया, तो 30 अक्टूबर 2026 को हिमाचल प्रदेश के सभी जिलों में मिड डे मील वर्कर्स विरोध प्रदर्शन करेंगी। इन प्रदर्शनों के माध्यम से सरकार और विभाग तक वर्कर्स की आवाज पहुंचाई जाएगी।

1–2 दिसंबर को हजारों वर्कर्स करेंगी दिल्ली कूच

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि 1–2 दिसंबर 2026 को दिल्ली में आयोजित होने वाले मजदूरों के महापड़ाव में हिमाचल प्रदेश से हजारों मिड डे मील वर्कर्स भाग लेंगी। प्रदेश के विभिन्न जिलों और ब्लॉकों में वर्कर्स को लामबंद किया जाएगा तथा उन्हें अपनी मांगों को लेकर दिल्ली पहुंचने के लिए जागरूक किया जाएगा।

यूनियन ने कहा कि मिड डे मील वर्कर्स लंबे समय से अपने मानदेय में बढ़ोतरी, बेहतर कार्य परिस्थितियों और सामाजिक सुरक्षा जैसी मांगों को लेकर संघर्ष कर रही हैं। सरकारें बच्चों के पोषण और शिक्षा से जुड़ी योजनाओं को लागू करने में इन वर्कर्स की महत्वपूर्ण भूमिका का लाभ उठाती हैं, लेकिन उनके आर्थिक और सामाजिक हितों की अनदेखी करती हैं। यूनियन ने केंद्र और प्रदेश सरकार से मांग की कि मिड डे मील वर्कर्स को सम्मानजनक मानदेय दिया जाए तथा उनकी सभी लंबित मांगों का शीघ्र समाधान किया जाए।

यूनियन ने हिमाचल प्रदेश की सभी मिड डे मील वर्कर्स से आह्वान किया कि वे 30 अक्टूबर के प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन को सफल बनाएं और 1–2 दिसंबर को दिल्ली में होने वाले महापड़ाव में बढ़-चढ़कर भाग लें। यूनियन ने स्पष्ट किया कि वर्कर्स के अधिकारों और सम्मान की लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक उनकी जायज मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की जाती।

📍 Location: शिमला (शिमला)

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