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मिड-डे मील वर्करों ने दिल्ली मजदूर प्रतिरोध कार्यक्रम के लिए कसी कमर, 1 दिसंबर को दिल्ली में होगा विशाल मजदूर मार्च

शिमला: मिड-डे मील वर्करज यूनियन की जिला कमेटी की बैठक शनिवार को किसान मजदूर भवन, चितकारा पार्क कैथू, शिमला में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता यूनियन की जिला अध्यक्ष शांति देवी ने की। बैठक में सीटू के राज्य उपाध्यक्ष अजय दुल्टा, जिला कोषाध्यक्ष बालक राम, सचिव रमाकांत मिश्रा, रंजीव कुठियाला, मिड-डे मील महासचिव राज मिला सहित बड़ी संख्या में यूनियन पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

बैठक में 1 दिसंबर 2026 को दिल्ली में प्रस्तावित विशाल मजदूर प्रतिरोध कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए व्यापक लामबंदी करने का निर्णय लिया गया। सीटू नेताओं ने कहा कि देशभर के मजदूरों के आह्वान पर होने वाले इस कार्यक्रम में हिमाचल से भी बड़ी संख्या में मिड-डे मील वर्कर और अन्य मजदूर शामिल होंगे। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से 30 नवंबर की रात तक दिल्ली पहुंचने का आह्वान किया।

सीटू के राज्य उपाध्यक्ष अजय दुल्टा, रमाकांत मिश्रा और बालक राम ने कहा कि मिड-डे मील वर्करों की स्थानीय मांगों को भी प्रमुखता से उठाया जाएगा। उन्होंने शिक्षा निदेशक की ओर से 24 सितंबर 2026 को जारी 12 महीने के वेतन संबंधी अधिसूचना को तुरंत वापस लेने, मिड-डे मील वर्करों को हर महीने वेतन देने तथा पूरा वेतन एक साथ जारी करने की मांग की।
बैठक में बताया गया कि दिल्ली में 1 दिसंबर को सुबह 10 बजे रामलीला मैदान से संसद और इंडिया गेट की ओर मजदूर मार्च निकाला जाएगा। सीटू नेताओं ने कहा कि यह केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि मजदूर वर्ग के अधिकारों और मांगों को लेकर संघर्ष को और तेज करने का प्रयास है।

उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों पर निशाना साधते हुए कहा कि बेरोजगारी, महंगाई, असमानता और रोजगार की असुरक्षा बढ़ रही है, जबकि मजदूरों के लंबे संघर्ष से हासिल अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने चार श्रम संहिताओं को वापस लेने, स्कीम वर्करों को मजदूर का दर्जा देने, न्यूनतम वेतन 42 हजार रुपये करने, सार्वभौमिक न्यूनतम पेंशन 21 हजार रुपये करने, रिक्त पदों को भरने और ठेका कर्मचारियों को समान काम का समान वेतन देने सहित छह प्रमुख मांगों को उठाया।

सीटू नेताओं ने कहा कि आंदोलन को हिमाचल में सरकारी, अर्ध-सरकारी, सार्वजनिक क्षेत्र, उद्योग, निर्माण, परिवहन, पर्यटन, स्वास्थ्य, शिक्षा, आंगनवाड़ी, मिड-डे मील, आशा, आउटसोर्स, ठेका और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों तक पहुंचाया जाएगा। हिमाचल के मजदूरों को भी न्यूनतम वेतन, नियमितीकरण, सामाजिक सुरक्षा, ईपीएफ, ईएसआई, ग्रेच्युटी, पेंशन और रोजगार की सुरक्षा जैसे मुद्दों को लेकर संघर्ष करना पड़ रहा है। ऐसे में दिल्ली का मजदूर प्रतिरोध कार्यक्रम प्रदेश के स्थानीय मजदूर आंदोलनों से भी सीधे जुड़ा है।

बैठक में कार्यकर्ताओं से गांव, पंचायत, औद्योगिक क्षेत्रों, सरकारी संस्थानों और कार्यस्थलों पर व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाकर मजदूरों को दिल्ली कार्यक्रम के लिए लामबंद करने का आह्वान किया गया। नेताओं ने कहा कि लाल झंडे के नीचे संगठित मजदूर वर्ग एकजुट होकर अपने अधिकारों की आवाज दिल्ली में बुलंद करेगा।

📍 Location: शिमला (शिमला)

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