Site icon Dainik Savera Times

देव मिलन के बाद लंका दहन की बारी, कुल्लू दशहरे का आज होगा समापन

Mohalla Festival Celebrates Sacred Deity Traditions : कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के छठे दिन ढालपुर मैदान में पारंपरिक मोहल्ला पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान देवी-देवताओं ने भगवान रघुनाथ के दरबार में हाजिरी भरी और एक-दूसरे के अस्थायी शिविरों में जाकर देव मिलन की परंपरा निभाई। माता हिडिंबा ने सबसे पहले भगवान रघुनाथ के दरबार में शीश नवाया। देव परंपरा के अनुसार, रात को भगवान रघुनाथ के शिविर में माता दुर्गा की विशेष पूजा होगी। इसके बाद मंगलवार को लंका चढ़ाई और लंका दहन की रस्मों के साथ उत्सव का समापन होगा।

https://dainiksaveratimes.com/wp-content/uploads/2026/10/1001196256.mp4

 दशहरा उत्सव के छठे दिन आए सभी देवी देवताओं ने भगवान रघुनाथ के दरबार में अपना शीश नवाजा और भगवान रघुनाथ के दरबार में सभी देवी देवताओं की एंट्री भी की गई। इसके बाद यह देवी देवता राजा की चानणी में पहुंचे और भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ी बरदार को भी प्रसाद के रूप में फूल दिए गए। ऐसे में देवी देवताओं ने मोहल्ला पर्व में एक दूसरे देवताओं के अस्थाई शिविर में जाकर मिलन की परंपरा को भी निभाया। मोहल्ला पर्व में सबसे पहले माता हिडिंबा भगवान रघुनाथ के दरबार पहुंची और भगवान रघुनाथ के छड़ी बरदार महेश्वर सिंह को प्रसाद भी दिया गया।

राजा की चानणी चांदनी में भी कई देवी देवताओं ने आपस में मिलन किया और अपने-अपने अस्थाई शिविरों की और रवाना हुए। मान्यता है की लंका चढ़ाई से पहले यह सभी देवी देवता भगवान रघुनाथ को शक्तियां प्रदान करते हैं और रात के समय भगवान रघुनाथ के शिविर में माता दुर्गा की भी विशेष पूजा की जाएगी। माता दुर्गा से लंका चढ़ाई का आशीर्वाद लिया जाएगा और उसके बाद मंगलवार को लंका दहन की सभी परंपराओं को पूरा किया जाएगा।

भगवान रघुनाथ के कारदार दानवेंद्र सिंह ने बताया कि मोहल्ला उत्सव के दिन से रावण को मारने की तैयारी होती है और रात के समय भगवान रघुनाथ के शिविर में दुर्गा पूजा की जाती है। दुर्गा पूजा के बाद माता दुर्गा से शक्ति मांगी जाती है और लंका दहन को पूरा किया जाता है। ऐसे में इस साल में मोहल्ला पर्व में सभी देवी देवताओं ने अपनी हाजिरी भरी और भगवान रघुनाथ के रजिस्टर में भी सभी देवी देवताओं की एंट्री की गई है। मंगलवार को लंका चढ़ाई के साथ ही अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव संपन्न हो जाएगा।

 

Exit mobile version