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सांसद सिकंदर कुमार ने सदन में उठाया हाइड्रोजन ट्रेन से जुड़ा मुद्दा, अश्विनी वैष्णव ने दिया जबाव

शिमलाः राज्यसभा सांसद एवं प्रदेश महामंत्री भाजपा डाॅ. सिकंदर कुमार ने सदन में रेल मंत्री से पूछा कि मानक विद्युत या डीजल मल्टी-यूनिट रेलगाड़ियों की तुलना में देश में विनिर्मित हाइड्रोजन ईंधन सेल रेलगाड़ी सेट को बनाने में कुल कितना व्यय हुआ? 2600 यात्रियों वाली हाइड्रोजन रेलगाड़ी को शुरू में व्यावसायिक तौर पर चलाने के लिए चुने गए प्रायोगिक मार्ग कौन-कौन से हैं और इन मार्गों पर हरित हाइड्रोजन उत्पादन और ईंधन भरने के स्टेशनों की कार्यात्मक स्थिति क्या है ? इस धुआं रहित ग्रीन प्रोपल्शन प्रणाली को अपनाने से वार्षिक कार्बन उत्सर्जन और ईंधन की लागत में कितनी कमी आने की उम्मीद है और क्या रेलवे में तैनात कर्मचारियों के लिए उच्च दाब हाइड्रोजन से जुड़े खतरों से निपटने के लिए कोई निकासी नवाचार और विशेष सुरक्षा प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किए गए हैं ?

रेल, सूचना और प्रसारण एवं इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सदन को बताया कि भारतीय रेल द्वारा रेलवे में हाइड्रोजन संचालित रेलगाड़ी प्रौद्योगिकी के उपयोग को प्रदर्शित करने के लिए प्रायोगिक आधार पर इस हाइड्रोजन रेलगाड़ी को विकसित किया गया है। इस ट्रेनसेट में हाइड्रोजन प्रदान करने के लिए जींद में एक समर्पित हाइड्रोजन संयंत्र स्थापित किया गया है। यह हाइड्रोजन भंडारण सुविधा निर्धारित संरक्षा मानकों और प्रोटोकॉल का अनुपालन निश्चित करते हुए पेट्रोलियम तथा विस्फोटक सुरक्षा संगठन के दिशा निर्देशों के अनुसार स्थापित की गई है।

केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि यह हाइड्रोजन ट्रेनसेट परिचालन शून्य कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन सुनिश्चित करता है जिसमें केवल जल वाष्प का उत्सर्जन होता है। यह ट्रेनसेट फ्यूल सेल तकनीक पर कार्य करता है जिसमें कर्षण ऊर्जा उत्पादन के लिए कोई चलायान पुर्जा और पारंपरिक इंजन नहीं है। इसलिए इसके परिचालन में शोर कम है जिससे ध्वनि प्रदूषण कम होता है। यह प्रायोगिक परियोजना कुल 141 करोड़ रुपये की लागत से विकसित की गई है।

केन्द्रीय मंत्री ने इस प्रौद्योगिकी की प्रमुख विशेषताओं का जिक्र करते हुए बताया कि इसे भारत में स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया गया है जो भारतीय रेल की आत्मनिर्भर भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वर्तमान में यह बड़ी लाइन प्लेटफार्म पर विश्व का सबसे लंबा (10 सवारी डिब्बों) और सबसे शक्तिशाली (2400 किलोवाट) हाइड्रोजन ट्रेनसेट है। इस ट्रेनसेट में 8 यात्रा डिब्बों वाली 1200 किलोवाट की दो ड्राइविंग पावर कार है जिनका कुल किलोवाट 2400 है। यह रेलवे में अगली पीढ़ी की ईंधन प्रौद्योगिकी के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम है जो स्वाभाविक रूप से शोर कम करेगा और आयातीत जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता को कम करेगा।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में, भारतीय रेल ने जींद-सोनीपत सर्किट पर प्रायोगिक आधार पर हाइड्रोजन-संचालित रेलगाड़ी प्रौद्योगिकी का संचालन शुरू किया है। उच्च दबाव वाले हाइड्रोजन खतरों का प्रबंधन करने हेतु परिचालन कर्मचारियों के लिए विशिष्ट अनुदेशों सहित संरक्षा दस्तावेज विकसित किए गए हैं, जो हाइड्रोजन प्रणाली से जुड़े जोखिमों की पहचान करने और उन्हें कम करने के लिए एक रूपरेखा प्रदान करते हैं। कर्मचारियों को सुरक्षित परिचालन और अनुकरण के लिए संगत प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।

📍 Location: शिमला (शिमला)

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