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शिमला में फिर व्हाइट क्रिसमस नहीं, 2016 के बाद से ही हो रहा ऐसा

शिमला। शिमला की जलवायु परिस्थितियां कई बार बदली हैं और पुराने समय के लोग इसके लिए मानवीय गतिविधियों में असामान्य वृद्धि को जिम्मेदार मानते हैं, इससे वायुमंडल में बड़ी मात्र में कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य ग्रीनहाउस गैसें निकली हैं। अपनी इमारतों की भव्यता के लिए जानी जाने वाली हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला, जहां कभी शाही सत्ता के संस्थान हुआ करते थे, जब शिमला ब्रिटिश भारत की ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में कार्य करता था, 2016 में भारी बर्फबारी के बाद से बर्फ रहित क्रिसमस की पूर्व संध्या देख रही है। इस बार भी शिमला और राज्य के अन्य जगहों पर व्हाइट क्रिसमस नहीं मनाया जाएगा।

अधिकांश पर्यटन स्थलों पर पूरे दिन हल्की धूप आपका स्वागत करेगी और मौसम वभिाग ने 26 दिसंबर तक आसमान साफ रहने की भविष्यवाणी की है। 2016 से पहले, ब्रिटिश भारत की पूर्ववर्ती राजधानी में 1991 में क्रिसमस पर बर्फबारी देखी गई थी जब 49 सेमी बर्फबारी दर्ज की गई थी। हालांकि 2014 और 2018 के बीच कुछ वर्षों में यूलटाइड स्पिरिट से पहले हल्के दौर आए थे। इसके अलावा 2010 को छोड़कर, पिछले 12 वर्षों में कोई श्वेत नववर्ष की पूर्वसंध्या नहीं हुई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के एक अध्ययन में शिमला की जलवायु परिस्थितियों में बदलाव के लिए वनों की कटाई और प्रदूषण को जिम्मेदार ठहराया गया है।

इसमें कहा गया है कि शिमला की कठोर सर्दी, जो आम तौर पर नवंबर में शुरू होती थी और मार्च में समाप्त होती थी, 1980 के दशक के मध्य के बाद कम हो गई है। अध्ययन में 1990 से 2007 तक शिमला में बर्फबारी की प्रवृत्ति की जांच की गई है। स्थानीय आईएमडी का कहना है कि 24 और 25 दिसंबर को पूरे राज्य में तेज धूप रहेगी। पिछले सप्ताह शिमला का तापमान नई दिल्ली की तुलना में काफी अधिक था।

पर्यटकों के लिए बर्फ की चादर एक बड़ा आकर्षण है, और आतिथ्य उद्योग के सदस्य व्हाइट क्रिसमस की संभावना से उत्साहित हैं, क्योंकि त्योहार सप्ताहांत के ठीक बाद पड़ता है। स्थानीय होटल व्यवसायी डी.पी. भाटिया ने आईएएनएस को बताया ’लोग क्रिसमस से पहले और बाद में बर्फबारी की संभावना के बारे में पूछ रहे हैं।’ उन्होंने कहा, ‘हम उनसे कह रहे हैं कि आएं और पहाड़ियों के बीच हल्की धूप का आनंद लें।‘ शिमला के ऐतिहासिक रिज और धर्मशाला व पालमपुर शहरों से दिखाई देने वाली पर्वत चोटियां बर्फ की चादर में लिपटी हुई हैं।

आईएमडी के अनुसार, शिमला, कसौली, चैल, कुफरी, नारकंडा, धर्मशाला, पालमपुर और मनाली जैसे पर्वतीय स्थलों में मौसम गर्म है और मैदानी इलाकों की कड़कड़ाती ठंड से राहत पाने के लिए बिल्कुल उपयुक्त है, जहां सूरज काफी हद तक कोहरे से ढका हुआ है।हालांकि, मौसम विभाग के अधिकारी नए साल की पूर्व संध्या पर बर्फबारी की संभावना को लेकर सतर्क हैं। उनका कहना है कि अभी भी यह अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी कि शिमला या मनाली या डलहौजी या कल्पा में अगले साल की सुबह बर्फ की चादर होगी या नहीं।

हालांकि मुख्य रूप से उत्तरी मैदानी इलाकों से आने वाले पर्यटक पहले से ही ‘व्हाइट‘ क्रिसमस की उम्मीद के साथ राज्य भर के पर्यटक रिसॉर्ट्स में आना शुरू कर चुके हैं।उनमें से कई लोगों ने व्हाइट क्रिसमस की उम्मीद में कमरे बुक किए हैं। चंडीगढ़ स्थित एक बहुराष्ट्रीय कंपनी के वरिष्ठ कार्यकारी दिनेश गुलेरिया ने कहा: ‘अगर बर्फबारी होती है, तो हम क्रिसमस की छुट्टियों को नारकंडा में एक होमस्टे में बिताना पसंद करेंगे। अन्यथा, हम शिमला में धूप वाले मौसम का आनंद लेंगे।‘ हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एचपीटीडीसी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, ‘हमारे अधिकांश केंद्र क्रिसमस की छुट्टियों के लिए आने वाले लोगों से खचाखच भर गए हैं।‘

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