करसोग : जिला मंडी के करसोग उपमंडल में पंचायत समिति वार्ड-12 मेहंडी के बैलेट पेपर में उम्मीदवार का नाम ही गायब मिला और उसकी जगह नोटा छपा हुआ था। हैरानी की बात यह रही कि नोटा के आगे वहीं चुनाव चिन्ह कुर्सी छपा था, जो उम्मीदवार होशियार सिंह को आवंटित किया गया था, इस मामले में निर्वाचन अधिकारी गौरव महाजन ने कहा कि बैलट पेपर में उम्मीदवार का नाम न होने का मामला सामने आया है, इसके बाद पंचायत समिति वार्ड के तहत दो पंचायतों के 10 बूथों पर पंचायत समिति का चुनाव रोक दिया गया है।
मामले का खुलासा उस समय हुआ, जब उम्मीदवार होशियार सिंह खुद थनाली फस्र्ट बूथ-1 पर वोट डालने पहुंचे, बैलेट पेपर में अपने नाम की जगह नोटा देखकर वह दंग रह गए और तुरंत चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को इसकी शिकायत दी शिकायत मिलते ही प्रशासन में हडक़ंप मच गया आनन-फानन में पंचायत समिति के तहत आने वाली दो पंचायतों थाच थर्मी और परलोग में चुनाव प्रक्रिया रोक दी गई इस वार्ड के तहत मेहंडी पंचायत में 28 मई को मतदान होना है, पंचायत समिति वार्ड-12 मेहंडी से पंचायत समिति पद के लिए कुल सात उम्मीदवारों के बीच मुकाबला है, जिसमें उम्मीदवार होशियार सिंह का बैलट पेपर में सातवें नंबर पर चुनाव चिन्ह अंकित किया गया है।
पंचायत समिति सदस्य का चुनाव स्थगित होते ही प्रत्याशी होशियार वर्मा ने प्रशासन के फैसले पर सीधा हमला बोला और इसे एकतरफा और नुकसान पहुंचाने वाला निर्णय करार दिया है, उनका तर्क है कि केवल एक पद पर बाद में चुनाव कराने से न सिर्फ चुनावी माहौल ठंडा पड़ जाएगा, बल्कि लोगों की दिलचस्पी भी कम हो जाएगी। इसका सीधा असर मतदान प्रतिशत पर दिखाई देगा और लोकतंत्र की असली भागीदारी कमजोर पड़ जाएगी।
होशियार वर्मा ने दो टूक शब्दों में कहा कि सिर्फ एक पद का चुनाव रोकना समझ से परे है, पंचायत समिति सदस्य का चुनाव रद्द करने भर से न्याय नहीं होगा अगर गड़बड़ी या विवाद की स्थिति बनी है, तो फिर इसी पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाले पंचायतों में पंचायत वार्ड सदस्य, उपप्रधान, प्रधान और जिला परिषद तक के सभी चुनावों को निरस्त कर दोबारा कराया जाना चाहिए।
होशियार वर्मा ने चेतावनी दी है कि प्रशासन अगर उनकी शिकायत और मांग को गंभीरता से नहीं लेता, तो वे इस लड़ाई को अदालत तक ले जाएंगे। उन्होंने साफ कहा कि यह सिर्फ एक उम्मीदवार की लड़ाई नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के मतदाताओं के अधिकारों का मामला है अब देखना होगा कि प्रशासन इस बढ़ते राजनीतिक दबाव के आगे क्या रुख अपनाता है।

