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जनहित के मुद्दों पर विपक्ष रहेगा मुखर : जयराम

Opposition vocal on public interest issues : शिमला। मानसून सत्र से पहले नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने साफ कहा कि विपक्ष सदन में रचनात्मक भूमिका निभाएगा, लेकिन जनता की आवाज दबाने या जनहित के मुद्दों को नजरअंदाज करने का प्रयास हुआ तो सरकार को सदन के अंदर और बाहर मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। उन्होंने सरकार पर विपक्षी सदस्यों के सवालों का समय पर जवाब न देने और बदले की भावना से कार्रवाई करने के आरोप भी लगाए।

उन्होंने कहा कि विपक्ष लोकतंत्र को मजबूत करने का हमेशा प्रयास करता है। जनता की आवाज़ प्रभावी ढंग से उठाई जा सके उसके लिए हम पूरा प्रयत्न करेंगे। बहुत सारी चीज़ें सरकार के व्यवहार पर निर्भर करती है। हम जनहित के मुद्दे छोड़ेंगे नहीं। पिछले कुछ समय से सरकार ने जनप्रतिनिधियों के खिलाफ़ बदले भी भावना से मामले दर्ज़ करने की एक सीरीज सी चला रखी है जो स्वस्थ परम्परा नहीं है। मामले गंभीर हैं तो जांच होनी चाहिए लेकिन अगर आप चाहते हैं कि विपक्ष की आवाज़ कैसे दबाई जाए ऐसा हम होने नहीं देंगे। न आज तक कोई हमें दबा सका है और न आगे दबा पाएगा। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार का फ़ोकस विकास पर होना चाहिए था लेकिन दुर्भाग्य से इन्होंने सिर्फ तालाबंदी का ही काम किया है। उन्होंने कहा कि एक और विषय आज औपचारिक बैठक में मैंने स्पीकर के समक्ष उठाया है कि पिछले चार साल में सरकार का रवैया ऐसा रहा है कि कोई भी विपक्ष का सदस्य सवाल पूछता है तो कहा जाता है कि सूचना एकत्र की जा रही है। जो सदन की गरिमा के खिलाफ़ है।

अधिकारी सूचना आगे सरकार तक दे देते हैं लेकिन सरकार के मंत्री और मुख्यमंत्री जानबूझकर कहते है सूचना एकत्र की जा रही है। यही नहीं कुछ विभागाध्यक्ष जानबूझकर सूचना छिपाने का काम करते हैं। मजबूरन हमें सूचना का अधिकार कानून का सहारा लेकर वही सूचना सदन में रखनी पड़ती है। इस बात को गंभीरता से लेना होगा। जयराम ठाकुर ज़ीरो आवर में भी सदस्य को तुरंत जवाब मिलने चाहिए। प्रश्न उठाने के बाबजूद अगर जवाब नहीं आता है तो ये सरकार की जवाबदेही है। अध्यक्ष ये सुनिश्चित करें कि मांगी गई सूचना सदस्यों को उपलब्ध करवाई जाए। हमने ये भी देखा है कि मुख्यमंत्री का व्यवहार सदन में सही नहीं होता। कई बार तो ये निम्नतम स्तर पर पहुंच जाता है। मुख्यमंत्री ठीक बात करेंगे तो हम उनको सुनेंगे और अगर व्यवहार गैरज़िम्मेदाराना रहा तो हम सहयोग नहीं का पाएंगे।

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