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रामपुर में हुई पंचायत समिति की हुई बैठक, नहीं हो पाई नई योजनाओं पर चर्चा

रामपुर/ बुशहर(मीनाक्षी):  रामपुर बुशहर में आज  सोमवार को पंचायत समिति की बैठक आयोजित की गई, जो कि पिछले छह महीनों के बाद हुई। यह बैठक खासा महत्व रखती थी क्योंकि इसमें क्षेत्र के विकास कार्यों पर चर्चा की जानी थी। लेकिन बैठक में समिति के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व बीडीओ के अलावा कई विभागों के अधिकारी भी मौजूद नहीं थे।  यह बैठक छह महीनों के अंतराल के बाद हो रही थी, और इस समयावधि में क्षेत्र में होने वाले विकास कार्यों पर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं मिल पाए थे।

सदस्यों की उम्मीद थी कि इस बैठक में विकास कार्यों की समीक्षा की जाएगी और उनके लिए नई योजनाओं पर चर्चा की जाएगी, लेकिन अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के अनुपस्थिति ने इन उम्मीदों को अधूरा छोड़ दिया। पंचायत समिति के सदस्य इस असमर्थता से निराश थे कि इतने लंबे समय के बाद होने वाली बैठक में भी कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।

वहीं जानकारी देते हुए बीडीसी सदस्य सराहन यशपाल पालसरा ने बताया कि विकास खंड अधिकारी का पद भी फिलहाल खाली पड़ा है, जिससे कार्यों में और अधिक रुकावटें उत्पन्न हो रही हैं। बिना किसी उचित अधिकारी के, विकास कार्यों की योजना बनाना और उन्हें लागू करना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने बताया कि यह स्थिति क्षेत्र के लिए नुकसानदेह हो सकती है, क्योंकि किसी भी सरकारी योजना को साकार करने के लिए संबंधित अधिकारी का होना जरूरी है।

यशपाल पालसरा ने बताया कि ऐसे में सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाएं  भी कागजों तक सीमित रह रही है। प्रभावि ढ़ंग से जमीनी स्तर पर नहीं उतर पा रही हैं। बैठक में यह मुद्दा भी उठाया गया कि अगर विकास कार्यों पर समय से चर्चा और निर्णय नहीं किए गए, तो इसका प्रत्यक्ष प्रभाव ग्रामीणों की जीवनशैली पर पड़ेगा। ग्रामीणों को सड़क, जल आपूर्ति, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की आवश्यकता है, लेकिन सरकार व प्रशासन की अनदेखी से ये कार्य बाधित हो रहे हैं।

पंचायत समिति के सदस्य इस बात को लेकर भी चिंतित थे कि क्या भविष्य में इस तरह की बैठकें असरदार होंगी या फिर ये सिर्फ औपचारिकता तक सीमित रह जाएंगी। वहीं बता दें कि रामपुर बुशहर की इस पंचायत समिति की बैठक को लेकर उम्मीदें अधिक थीं, लेकिन अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की अनुपस्थिति और विकास खंड अधिकारी के बैठक में उपस्थित न होने पर निराशा हाथ लगी। अब यह देखना है कि क्या सरकार व प्रशासन इस स्थिति को सुधारने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगा, या फिर यह क्षेत्र अपनी बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए और इंतजार करेगा।

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