जम्मू कश्मीर डेस्कः ताराकोट–सांझीछत रोपवे परियोजना के विरोध में श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति की रघुनाथ मंदिर में हुई बैठक के बाद कटड़ा में भारी जनआक्रोश सड़कों पर देखने को मिला। स्थानीय लोगों और छोटे व्यापारियों ने आजीविका पर संकट का हवाला देते हुए परियोजना का जमकर विरोध किया। रविवार को संघर्ष समिति के नेतृत्व में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने बाजार से रैली निकाली और श्रीधर चौक की ओर नारेबाजी करते हुए आगे बढ़े। पूरे रास्ते प्रदर्शनकारियों ने भाजपा और विधायक के खिलाफ नारे लगाए। “लोगों को बांटना बंद करो”, “रोपवे नहीं चाहिए” और “भाजपा-विधायक जवाब दो” जैसे नारे गूंजते रहे।
स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब पुलिस ने श्रीधर चौक के पास प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हल्की धक्का-मुक्की हुई। गुस्साए लोग सड़कों पर दौड़ते हुए विधायक कार्यालय की ओर बढ़ने का प्रयास करते रहे। हालात को देखते हुए पुलिस ने अतिरिक्त बल तैनात कर अंबिका चौक पर बैरिकेडिंग कर दी और प्रदर्शनकारियों को वहीं रोक लिया। काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया, हालांकि माहौल देर तक तनावपूर्ण बना रहा।
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प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे विधायक से यह पूछना चाहते हैं कि आखिर वे कौन लोग हैं जो कटड़ा से दो गंडोले लगाए जाने का समर्थन कर रहे हैं। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि रोपवे परियोजना के नाम पर लोगों को गुमराह किया जा रहा है और समाज को आपस में बांटने की कोशिश हो रही है, जबकि स्थानीय हितों की पूरी तरह अनदेखी की जा रही है। संघर्ष समिति ने उपराज्यपाल द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति को एक सप्ताह का समय दिया है। समिति के सदस्यों ने चेतावनी दी कि यदि इस अवधि में कोई ठोस निर्णय या जवाब नहीं आया तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा, जिसकी कल्पना प्रशासन ने भी नहीं की होगी।
हितधारकों पर सवाल
संघर्ष समिति ने सवाल उठाया कि वे कौन-से हितधारक हैं जिन्होंने लिखित रूप में ताराकोट-सांझीछत रोपवे परियोजना का स्वागत किया है। समिति का आरोप है कि जिन संस्थाओं के नाम सामने आए हैं, उनमें से एक सीनियर सिटीजन फोरम विधायक के बड़े भाई की है, सनातन धर्म सभा उनके भांजे से जुड़ी है, जबकि एक अन्य संस्था रियासी में भाजपा से जुड़े एक समूह की बताई जा रही है। समिति ने प्रशासन और उच्च स्तरीय समिति से मांग की है कि रोपवे परियोजना को पूरी तरह रद्द किया जाए। उनका कहना है कि यदि परियोजना पूरी हुई तो कटड़ा उजड़ जाएगा और लाखों लोग बेरोजगार हो जाएंगे।
आस्था, आजीविका और भविष्य का सवाल
संघर्ष समिति का कहना है कि यह सिर्फ रोपवे का मुद्दा नहीं है, बल्कि कटड़ा की आस्था, आजीविका और भविष्य से जुड़ा मामला है। प्रदर्शन में ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोगों में भी भारी जोश देखने को मिला। लोगों का कहना था कि भविष्य में वे सोच-समझकर मतदान करेंगे और जनभावनाओं की अनदेखी करने वालों को राजनीतिक रूप से इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
प्रदर्शन के दौरान समिति अध्यक्ष बलिराम राणा, राजेश सदोत्रा, करण सिंह, प्रभात सिंह मंगली, सीनियर सिटीजन मोहन लाल, वरुण मगोत्रा, सोहन चंद सहित बड़ी संख्या में व्यापारी और स्थानीय लोग मौजूद रहे। फिलहाल पुलिस और प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
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