Raise Safety Concerns Over Twin Tunnel Project : शिमला। चलौंठी-भट्टाकुफर क्षेत्र में निर्माणाधीन ट्विन टनल और राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना को लेकर शांति विहार, संजौली में स्थानीय लोगों की बैठक हुई। सांसद सुरेश कश्यप की मौजूदगी में लोगों ने टनल एलाइनमेंट, भवनों में दरारें, सुरक्षा, मुआवजा और जनसुनवाई से जुड़े मुद्दे उठाए।
बैठक में एनएचएआई अधिकारियों ने बताया कि संबंधित कार्य फिलहाल रोका गया है और IIT रुड़की की विशेषज्ञ टीम जियो-टेक्निकल अध्ययन कर रही है। स्थानीय लोगों ने परियोजना के सर्वे, टनल एलाइनमेंट, भवनों में आई दरारों, सुरक्षा, मुआवजे, जनसुनवाई तथा भविष्य में आवासीय क्षेत्रों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों से संबंधित मुद्दे उठाए। बैठक में एनएचएआई के अधिकारी चंदेल और कपूर भी उपस्थित रहे और स्थानीय लोगों के सवालों का सामना किया। बैठक के दौरान लोगों ने परियोजना से संबंधित अपनी आशंकाएं और समस्याएं विस्तार से अधिकारियों तथा सांसद के समक्ष रखीं। बैठक में बताया गया कि स्थानीय लोगों ने ट्विन टनल प्रभावित संघर्ष समिति का गठन किया है।
समिति ने भट्टाकुफर वार्ड के पार्षद नरेंद्र ठाकुर और शांति विहार वार्ड के पार्षद विनीत शर्मा को प्रभावित लोगों से जुड़े विषय संबंधित अधिकारियों और अन्य मंचों के समक्ष उठाने के लिए अधिकृत किया है। स्थानीय लोगों ने बताया कि प्रभावित परिवारों एवं संपत्ति मालिकों में अंशुल चौहान, आई.डी. शर्मा, रवीना, डॉ. करुणा, डॉ. जोगटा, डी.डी. मेहता, नवप्रीत सिंह, मेहता पेट्रोल पंप और बलबीर वर्मा सहित अन्य लोग शामिल हैं। बैठक में गोविंद चित्रांटा, राजिंदर चौहान, अमित गांगटा, सविता ठाकुर और नितिका कैंथला सहित स्थानीय लोगों ने भी विभिन्न मुद्दे प्रमुखता से उठाए।
पुराने सर्वे और मौजूदा एलाइनमेंट पर उठे सवाल बैठक में स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि परियोजना का कार्य पूर्व में किए गए सर्वे के अनुरूप नहीं किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि पुराने सर्वे, वर्तमान एलाइनमेंट और निर्माण की तकनीकी प्रक्रिया की विस्तृत जांच की जाए और पूरी स्थिति लोगों के सामने स्पष्ट की जाए। स्थानीय लोगों ने क्षेत्र की भौगोलिक और भूगर्भीय संवेदनशीलता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बड़े स्तर की परियोजना पर आगे बढ़ने से पहले विस्तृत जियो-टेक्निकल और सुरक्षा मूल्यांकन बेहद आवश्यक है। लोगों का कहना था कि परियोजना शुरू करने से पहले प्रभावित क्षेत्र में व्यापक जनसुनवाई नहीं हुई और सभी हितधारकों तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों को पर्याप्त रूप से विश्वास में नहीं लिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान एवं पूर्व पार्षदों के साथ भी परियोजना को लेकर आवश्यक स्तर का संवाद नहीं किया गया। स्थानीय लोगों ने आशंका जताई कि टनल निर्माण का असर बड़ी संख्या में आवासीय भवनों पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में ढलान अत्यधिक है और किसी एक भवन अथवा भू-भाग में अस्थिरता आने की स्थिति में आसपास के अन्य भवनों पर भी प्रभाव पड़ने का खतरा हो सकता है। शांति विहार में भवनों में दरारें आने की शिकायतें पहले भी सामने आई हैं। प्रशासन ने सितंबर में टनल निर्माण से संबंधित कार्य को रोकते हुए IIT रुड़की के विशेषज्ञों से वैज्ञानिक एवं तकनीकी आकलन कराने का निर्णय लिया था। घर और टनल की दूरी पर भी जताई चिंता बैठक में स्थानीय लोगों ने टनल और आवासीय भवनों के बीच दूरी को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उनका दावा था कि कुछ स्थानों पर टनल आवासीय भवनों के बेहद करीब से गुजर रही है।
उन्होंने इसकी स्वतंत्र तकनीकी जांच करवाने की मांग की। स्थानीय लोगों ने लक्ष्मीनारायण मंदिर सहित क्षेत्र के धार्मिक एवं सामाजिक महत्व वाले स्थानों की सुरक्षा का विषय भी उठाया और कहा कि लोगों की धार्मिक भावनाओं से जुड़े स्थलों पर परियोजना के संभावित प्रभाव का भी आकलन किया जाना चाहिए। लोगों ने कहा कि जिन भवनों और भूमि का अधिग्रहण किया गया है तथा जिन परिवारों को नुकसान हुआ है, उनके मामलों में पारदर्शिता और उचित मुआवजा सुनिश्चित किया जाए। IIT रुड़की की टीम कर रही जियो-टेक्निकल अध्ययन बैठक में एनएचएआई अधिकारियों ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि फिलहाल संबंधित कार्य रोका गया है और IIT रुड़की की विशेषज्ञ टीम जियो-टेक्निकल अध्ययन कर रही है। अधिकारियों ने कहा कि तकनीकी रिपोर्ट आने के बाद सुरक्षा संबंधी पहलुओं का आकलन करते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी।

