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बीबीएमबी पर हिमाचल की ऐतिहासिक जीत की नींव धूमल सरकार के संघर्ष से पड़ी : डॉ. राजीव बिंदल

शिमला। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने बीबीएमबी की जलविद्युत परियोजनाओं में हिमाचल प्रदेश के लंबित बिजली बकाये को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के 6 नवंबर 2026 के फैसले को प्रदेश की जनता के अधिकारों की ऐतिहासिक जीत बताया है। उन्होंने कहा कि इस जीत की नींव पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के संघर्ष से पड़ी थी, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के सहयोग से इस लंबे विवाद का निर्णायक समाधान संभव हुआ है।

डॉ. बिंदल ने कहा कि इस ऐतिहासिक फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर और केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया जाना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें इस फैसले का राजनीतिक श्रेय लेने के बजाय प्रदेश की जनता को इसके पीछे का पूरा इतिहास बताना चाहिए। उन्होंने बताया कि पंजाब पुनर्गठन के बाद वर्ष 1966 में हिमाचल के अधिकारों का यह मामला शुरू हुआ था। प्रदेश ने 1969 में अपनी हिस्सेदारी का दावा केंद्र सरकार के समक्ष रखा। समाधान नहीं निकलने पर वर्ष 1996 में सर्वोच्च न्यायालय में मूल वाद दायर किया गया। इसके बाद हिमाचल को अपने अधिकारों के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी।

बिंदल ने कहा कि 27 सितंबर 2011 को प्रो. प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के कार्यकाल में सर्वोच्च न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश की 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी के कानूनी अधिकार को मान्यता दी थी। यह फैसला प्रदेश के अधिकारों की लड़ाई में सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि जब वर्ष 2011 में हिमाचल के अधिकार निर्धारित हो चुके थे, तो कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में वर्षों तक बिजली के बकाये का अंतिम निपटारा क्यों नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की ओर से भारत के महान्यायवादी के माध्यम से प्रस्तुत कैशलेस सेटलमेंट फॉर्मूले ने विवाद के समाधान का रास्ता खोला। इस व्यवस्था में नकद भुगतान के बजाय बिजली के रूप में बकाये का निपटारा करने का प्रस्ताव रखा गया, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने स्वीकार किया।

बिंदल के अनुसार, केंद्र सरकार की गणना के मुताबिक हिमाचल का कुल बिजली बकाया 13,066 मिलियन यूनिट निर्धारित हुआ। प्रदेश की 420.77 करोड़ रुपये की पूंजीगत देनदारी को 3.85 रुपये प्रति यूनिट की दर से समायोजित करने के बाद लगभग 1,093 मिलियन यूनिट की कटौती की गई। इसके बाद हिमाचल को करीब 11,973 मिलियन यूनिट बिजली मिलेगी। आदेश के अनुसार पंजाब और हरियाणा अगले 20 वर्षों तक अक्टूबर से मार्च के बीच प्रतिवर्ष लगभग 598 मिलियन यूनिट बिजली हिमाचल को उपलब्ध करवाएंगे।

किशाऊ बांध और सिरमौर के पानी को लेकर भी साधा निशाना

डॉ. बिंदल ने किशाऊ बांध परियोजना का जिक्र करते हुए कहा कि इसके सफल क्रियान्वयन में भी केंद्र की मोदी सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका है। केंद्र सरकार ने परियोजना का 90 प्रतिशत खर्च वहन करने की स्वीकृति दी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को इस योगदान का भी श्रेय केंद्र सरकार को देना चाहिए। वहीं, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर सिरमौर जिले के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए बिंदल ने कहा कि मुख्यमंत्री ने सिरमौर की जनता के अधिकारों से समझौता किया है। उनके अनुसार, सिरमौर के किसानों को मिलने वाले पानी को दिल्ली और राजस्थान के लिए देने का फैसला क्षेत्र के किसानों के हितों के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे सिरमौर की आने वाली पीढ़ियों के जल अधिकार प्रभावित होंगे।

बिंदल ने कहा कि मुख्यमंत्री इस फैसले को अपनी उपलब्धि के रूप में पेश कर रहे हैं, जबकि सिरमौर की जनता और किसानों के हितों को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने दोहराया कि बीबीएमबी का फैसला किसी एक राजनीतिक दल की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश के अधिकारों की जीत है। इसमें धूमल सरकार के कानूनी संघर्ष और केंद्र की मोदी सरकार के समाधानकारी प्रयासों की अहम भूमिका रही है।

📍 Location: शिमला (शिमला)

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