Last Updated: October 29, 2026

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सेस लगाओ,जनता पर बोझ डालो… राकेश जमवाल ने सुक्खू सरकार पर साधा निशाना

August 12, 2026

सेस लगाओ,जनता पर बोझ डालो… राकेश जमवाल ने सुक्खू सरकार पर साधा निशाना

शिमला। भाजपा प्रदेश मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक राकेश जमवाल ने हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार द्वारा पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल पर 60 पैसे प्रति लीटर अनाथ एवं विधवा सेस लगाने के निर्णय पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि सुक्खू सरकार की आर्थिक नीति का एक ही मूल मंत्र दिखाई दे रहा है—टैक्स बढ़ाओ, सेस लगाओ और जनता पर बोझ डालो।

राकेश जमवाल ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने सत्ता संभालने के कुछ ही समय बाद जनवरी 2023 में डीजल पर VAT का बोझ लगभग ₹4.40 प्रति लीटर से बढ़ाकर ₹7.40 प्रति लीटर कर दिया था। यानी लगभग ₹3 प्रति लीटर की सीधी बढ़ोतरी। इसके केवल छह महीने बाद जुलाई 2023 में सरकार ने दोबारा डीजल VAT में ₹3 प्रति लीटर की वृद्धि करते हुए इसे ₹7.40 से बढ़ाकर ₹10.40 प्रति लीटर कर दिया। इस प्रकार वर्ष 2023 में ही कांग्रेस सरकार ने दो चरणों में डीजल पर लगभग ₹6 प्रति लीटर अतिरिक्त VAT का बोझ डाल दिया।

अब सरकार ने एक कदम और आगे बढ़ाते हुए 11 अगस्त 2026 की मध्यरात्रि से पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल दोनों पर 60 पैसे प्रति लीटर नया अनाथ एवं विधवा सेस लागू कर दिया है। उन्होंने कहा कि विधानसभा में पारित VAT संशोधन कानून सरकार को इस मद में अधिकतम ₹5 प्रति लीटर तक सेस लगाने की शक्ति देता है, हालांकि वर्तमान अधिसूचना में इसकी दर 60 पैसे प्रति लीटर निर्धारित की गई है। इससे जनता पर तत्काल अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है।

राकेश जमवाल ने कहा कि सरकार की टैक्स बढ़ाने की नीति केवल पेट्रोलियम पदार्थों तक सीमित नहीं है। कांग्रेस सरकार ने सीमेंट पर लगने वाले Additional Goods Tax को ₹11 से बढ़ाकर ₹16 प्रति बैग कर दिया था, यानी एक ही झटके में ₹5 प्रति सीमेंट बैग का अतिरिक्त बोझ। उन्होंने कहा कि यह विडंबना है कि एक तरफ केंद्र सरकार द्वारा GST में राहत के बाद सीमेंट की लागत कम होने की उम्मीद बनी थी, वहीं प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने राज्य स्तर का टैक्स बढ़ाकर उसका लाभ हिमाचल की जनता तक पहुंचने से रोकने का काम किया।

राकेश जमवाल ने कहा कि जनवरी 2023 में डीजल पर करीब ₹3 प्रति लीटर VAT बढ़ाया, जुलाई 2023 में फिर ₹3 प्रति लीटर बढ़ाया, सीमेंट पर टैक्स ₹11 से ₹16 प्रति बैग कर दिया और अब पेट्रोल-डीजल दोनों पर 60 पैसे प्रति लीटर नया सेस लगा दिया। आखिर हिमाचल की जनता पर कांग्रेस सरकार और कितना आर्थिक बोझ डालेगी? उन्होंने कहा कि हिमाचल जैसे पहाड़ी प्रदेश में डीजल की कीमत बढ़ने का प्रभाव केवल गाड़ी चलाने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। प्रदेश में लगभग हर आवश्यक वस्तु सड़क मार्ग से पहुंचती है। इसलिए ईंधन महंगा होने से सीमेंट, सरिया, रेत-बजरी, फल-सब्जी, राशन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई लागत पर भी दबाव बढ़ता है। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा नुकसान किसान-बागवान, ट्रांसपोर्टर, टैक्सी चालक, छोटे व्यापारी, मध्यम वर्ग और मकान बनाने वाले सामान्य परिवारों को उठाना पड़ता है। पहले सीमेंट पर ₹5 प्रति बैग अतिरिक्त टैक्स और अब उसे ढोने वाले वाहनों के डीजल पर नया सेस—यह आम आदमी पर दोहरी मार है।

राकेश जमवाल ने कहा कि अनाथ बच्चों और विधवाओं का कल्याण सरकार की जिम्मेदारी है और भाजपा ऐसे प्रत्येक कल्याणकारी प्रयास का समर्थन करती है, लेकिन इसके लिए संसाधन सरकार को बेहतर वित्तीय प्रबंधन और अपने बजट से उपलब्ध करवाने चाहिए। अनाथ और विधवा कल्याण जैसे संवेदनशील विषय के नाम पर पूरे प्रदेश की जनता पर नया सेस लगाना सरकार के आर्थिक कुप्रबंधन का समाधान नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इसे ‘सुख की सरकार’ कहती है, लेकिन वास्तविकता में यह ‘बोझ की सरकार’ बन चुकी है। जनता को राहत देने के बजाय कभी VAT, कभी सेस, कभी बिजली-पानी की दरें और कभी अन्य शुल्क बढ़ाकर उसकी जेब पर लगातार हमला किया जा रहा है।

राकेश जमवाल ने सरकार से पेट्रोल और डीजल पर लगाए गए 60 पैसे प्रति लीटर नए सेस पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए कहा कि सरकार अपने खर्चों और वित्तीय प्रबंधन में सुधार करे और हर आर्थिक समस्या का समाधान हिमाचल की जनता की जेब में ढूंढना बंद करे। उन्होंने कहा कि दो बार डीजल VAT में ₹3-₹3 की बढ़ोतरी, सीमेंट पर ₹5 प्रति बैग अतिरिक्त टैक्स और अब पेट्रोल-डीजल पर 60 पैसे का नया सेस ये आंकड़े स्वयं बता रहे हैं कि कांग्रेस सरकार का आर्थिक मॉडल राहत का नहीं, जनता पर लगातार बोझ बढ़ाने का मॉडल है।”आज के नए सेस का सत्यापित तथ्य: 60 पैसे प्रति लीटर की दर 11 अगस्त 2026 की मध्यरात्रि से लागू हुई है और इसे पेट्रोल तथा हाई-स्पीड डीजल की पहली बिक्री पर वसूला जाना है।

📍 Location: शिमला (शिमला)

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