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सुक्खू सरकार में परियोजनाओं की गति पर लगे ब्रेक : रणधीर शर्मा

शिमला। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी एवं विधायक रणधीर शर्मा ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के बयान पर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल और उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान की प्रतिक्रिया पर कड़ा पलटवार किया है। शर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार के मंत्रियों को हिमाचल प्रदेश में केंद्र सरकार के सहयोग से संचालित विकास परियोजनाओं का अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के मंत्री तथ्यों का जवाब देने के बजाय राजनीतिक बयानबाजी में लगे हुए हैं।

रणधीर शर्मा ने कहा कि डबल इंजन सरकार के कार्यकाल में केंद्र और राज्य के समन्वय से हिमाचल प्रदेश में सड़क, रेल, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और औद्योगिक विकास की अनेक महत्वपूर्ण परियोजनाओं को आगे बढ़ाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में कई परियोजनाएं प्रशासनिक देरी, लंबित स्वीकृतियों और वित्तीय प्रबंधन की समस्याओं से प्रभावित हो रही हैं।

उन्होंने कहा, “कांग्रेस के मंत्रियों ने केवल एक ऐसा राजनीतिक चश्मा पहन रखा है जिसमें उन्हें मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का दिखाया हुआ चाल-चरित्र ही नजर आता है। उन्हें न केंद्र सरकार का सहयोग दिखाई देता है, न स्वीकृत परियोजनाएं और न ही उन परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही समस्याएं।” रणधीर शर्मा ने कहा कि केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने हिमाचल प्रदेश में विकास परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान अनेक महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखे हैं। कांग्रेस सरकार को इनका तथ्यात्मक जवाब देना चाहिए।

हिमाचल में ₹1.20 लाख करोड़ से अधिक की परियोजनाओं और सहायता प्रावधानों का उल्लेख

रणधीर शर्मा ने कहा कि हाल की केंद्रीय समीक्षा में राष्ट्रीय राजमार्गों की ₹55,103 करोड़, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की ₹13,697 करोड़, भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी रेल परियोजना की ₹13,410 करोड़ और चंडीगढ़-बद्दी रेल परियोजना की ₹1,540 करोड़ लागत का उल्लेख हुआ।

इसी प्रकार किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना की अनुमानित लागत ₹15,624 करोड़, रेणुकाजी बांध परियोजना की लगभग ₹7,000 करोड़ तथा लूहरी स्टेज-I परियोजना की लगभग ₹1,800 करोड़ है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में एम्स बिलासपुर पर ₹1,400 करोड़ से अधिक, तीन मेडिकल कॉलेजों के लिए लगभग ₹547 करोड़, ऊना पीजीआई सैटेलाइट सेंटर के लिए ₹495 करोड़, आईजीएमसी सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक के लिए ₹200 करोड़, जायका स्वास्थ्य परियोजना के लिए ₹1,422 करोड़ तथा पीएम-अभीम के अंतर्गत लगभग ₹360 करोड़ की परियोजनाओं और सहायता का उल्लेख किया गया है।

इसके अतिरिक्त ऊना बल्क ड्रग पार्क के लिए ₹1,000 करोड़ का केंद्रीय अनुदान, विशेष पूंजीगत निवेश सहायता के अंतर्गत ₹2,381 करोड़ का प्रावधान, आपदा पुनर्निर्माण के लिए लगभग ₹2,006 करोड़ का पैकेज तथा बाह्य सहायता प्राप्त पुनर्निर्माण परियोजना के लिए लगभग ₹2,150 करोड़ का प्रावधान भी शामिल है।

रणधीर शर्मा ने कहा कि इन मदों का कुल परियोजना एवं सहायता मूल्य ₹1.20 लाख करोड़ से अधिक बनता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसमें विभिन्न चरणों की परियोजना लागत, केंद्रीय सहायता और वित्तीय प्रावधान शामिल हैं, जिन्हें राज्य सरकार को एकमुश्त प्राप्त धनराशि नहीं कहा जा सकता। उन्होंने मांग की कि प्रदेश सरकार इन सभी परियोजनाओं में अब तक प्राप्त धन, व्यय की गई राशि और शेष कार्यों की स्थिति सार्वजनिक करे।

स्वास्थ्य विभाग की परियोजनाओं पर सरकार से सवाल

रणधीर शर्मा ने कहा कि केंद्रीय मंत्री नड्डा ने पीएम-अभीम योजना के अंतर्गत स्वीकृत लगभग ₹360 करोड़ के उपयोग और स्वास्थ्य सुविधाओं के निर्माण में हो रही देरी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि 9 अक्टूबर की परियोजना समीक्षा में नौ स्वीकृत क्रिटिकल केयर ब्लॉकों में से केवल एक के पूरा होने, 12 एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं में से किसी के भी पूरा नहीं होने तथा 73 ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट में से 29 के निर्माण की जानकारी सामने आई थी।

शर्मा ने पूछा कि स्वास्थ्य मंत्री स्पष्ट करें कि इन संस्थानों में से कितने वर्तमान में मरीजों को सेवाएं प्रदान कर रहे हैं और शेष कब तक संचालित होंगे। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री को केवल राजनीतिक प्रतिक्रिया देने के बजाय अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं, स्वीकृत पदों, रिक्तियों और लंबित परियोजनाओं का विस्तृत विवरण जनता के सामने रखना चाहिए।

बल्क ड्रग पार्क और मेडिकल डिवाइस पार्क पर भी मांगा जवाब

रणधीर शर्मा ने कहा कि ऊना बल्क ड्रग पार्क के लिए केंद्र सरकार द्वारा ₹1,000 करोड़ का अनुदान स्वीकृत किया गया है। परियोजना समीक्षा के अनुसार ₹225 करोड़ जारी किए जा चुके हैं और लगभग ₹117 करोड़ का उपयोग हुआ है। उन्होंने कहा कि उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान को बताना चाहिए कि शेष राशि के उपयोग, औद्योगिक ढांचे के विकास और परियोजना को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के लिए क्या कार्ययोजना तैयार की गई है।

उन्होंने मेडिकल डिवाइस पार्क के लिए प्रस्तावित लगभग ₹100 करोड़ की केंद्रीय सहायता से संबंधित राज्य सरकार के निर्णयों पर भी स्पष्टीकरण मांगा। शर्मा ने कहा कि औद्योगिक परियोजनाओं का समय पर क्रियान्वयन रोजगार, निवेश और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।

रेल परियोजनाओं में राज्य की लंबित हिस्सेदारी पर सवाल

रणधीर शर्मा ने कहा कि चंडीगढ़-बद्दी रेल परियोजना की लागत लगभग ₹1,540 करोड़ है। हाल की समीक्षा में राज्य सरकार की लगभग ₹231 करोड़ की लंबित हिस्सेदारी का मुद्दा उठाया गया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि यह राशि कब जारी की जाएगी। उन्होंने भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी रेल परियोजना में भूमि अधिग्रहण और मुआवजा संबंधी लंबित प्रक्रियाओं को भी शीघ्र पूरा करने की मांग की।

आपदा सहायता और पुनर्निर्माण कार्यों का हिसाब दे सरकार

रणधीर शर्मा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में आपदा के बाद पुनर्निर्माण और पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार की ओर से विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत सहायता और परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। उन्होंने लगभग ₹2,006 करोड़ के PDNA पैकेज और लगभग ₹2,150 करोड़ की बाह्य सहायता प्राप्त पुनर्निर्माण परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार को प्रत्येक मद की स्वीकृति, वास्तविक प्राप्ति, व्यय और कार्यों की प्रगति अलग-अलग सार्वजनिक करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आपदा प्रभावित लोगों के लिए समय पर पुनर्निर्माण कार्य पूरे करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

कांग्रेस मंत्रियों से पांच सवाल

रणधीर शर्मा ने पूछा कि केंद्र से स्वीकृत परियोजनाओं में अब तक कितनी राशि जारी हुई है और कितनी खर्च की गई है? स्वास्थ्य क्षेत्र की लंबित परियोजनाओं के पूरा होने की निर्धारित तिथि क्या है? बल्क ड्रग पार्क की प्रगति क्या है? रेल परियोजनाओं में राज्य की लंबित हिस्सेदारी कब जारी होगी? तथा आपदा पुनर्निर्माण के लिए उपलब्ध धनराशि से कितने कार्य पूरे किए गए हैं? उन्होंने कहा कि इन प्रश्नों का उत्तर आंकड़ों और दस्तावेजों के साथ दिया जाना चाहिए।

रणधीर शर्मा ने कहा कि प्रदेश के विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच प्रभावी समन्वय आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार अपनी प्रशासनिक कमियों से ध्यान हटाने के लिए बार-बार केंद्र सरकार पर आरोप लगाती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के मंत्री यदि केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों से असहमत हैं तो उन्हें परियोजनावार आधिकारिक विवरण सार्वजनिक करना चाहिए।

रणधीर शर्मा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के विकास का सवाल राजनीतिक बयानबाजी से बड़ा है। केंद्र से स्वीकृत प्रत्येक परियोजना का लाभ समय पर जनता तक पहुंचे, यह सुनिश्चित करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री और उनके मंत्रियों को आरोप-प्रत्यारोप छोड़कर विकास कार्यों की प्रगति पर जवाब देना चाहिए।

📍 Location: शिमला (शिमला)

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