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हिमाचल में मानव-वन्यजीव संघर्ष पर होगा त्वरित मूल्यांकन, 10 वन मंडलों का चयन

शिमला। हिमाचल प्रदेश में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए वन्यप्राणी प्रभाग, वन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में विशेषज्ञ संस्थान द्वारा त्वरित मूल्यांकन किया जाएगा। इसके तहत मानव-भालू और मानव-तेंदुआ संघर्ष की अधिक घटनाओं वाले 10 वन मंडलों को प्रारंभिक अध्ययन के लिए चयनित किया गया है। अध्ययन के बाद संबंधित क्षेत्रों की परिस्थितियों के अनुरूप प्रबंधन कार्ययोजना और एक्शन प्लान तैयार कर वन्यप्राणी प्रभाग को सौंपा जाएगा।

इसी सिलसिले में शनिवार को शिमला स्थित वन मुख्यालय में वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया तथा सलीम अली सेंटर फॉर ऑर्निथोलॉजी एंड नेचुरल हिस्ट्री, कोयंबटूर की टीम ने वन्यप्राणी प्रभाग के प्रधान मुख्य अरण्यपाल आलोक प्रेम नागर, आईएफएस के साथ बैठक की। बैठक में हिमाचल में मानव-वन्यजीव संघर्ष की वर्तमान स्थिति, इसके प्रमुख कारणों और प्रभावी प्रबंधन उपायों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।

प्रधान मुख्य अरण्यपाल आलोक प्रेम नागर ने कहा कि त्वरित मूल्यांकन के माध्यम से प्रदेश में भालू और तेंदुए से जुड़े मानव-वन्यजीव संघर्ष के वास्तविक कारणों को विस्तृत रूप से समझने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि अध्ययन से सामने आने वाले कारणों के आधार पर भविष्य में संघर्ष की घटनाओं को कम करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने इस मूल्यांकन को मानव-वन्यजीव संघर्ष के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

वहीं, अरण्यपाल शिमला दक्षिण प्रीति भंडारी, आईएफएस ने बताया कि अध्ययन के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों और वन्यजीव प्रजातियों के अनुसार कार्ययोजना तैयार की जाएगी। टीम स्थानीय परिस्थितियों का आकलन करने के साथ ही लोगों से संवाद करेगी और उन्हें मानव-वन्यजीव संघर्ष से बचाव तथा वन्यजीवों के प्रति जागरूकता के बारे में जानकारी देगी।

उन्होंने कहा कि क्षेत्रवार सामने आने वाले कारणों के आधार पर उनके निवारण के प्रयास किए जाएंगे, ताकि मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष को प्रभावी ढंग से कम किया जा सके।

📍 Location: शिमला (शिमला)

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