Last Updated: October 26, 2026

Dainik Savera Times Logo

क्या हिमाचल की आर्थिक बदहाली का समाधान अब ‘किस्मत का टिकट’ है? : गोविंद सिंह ठाकुर

August 29, 2026

क्या हिमाचल की आर्थिक बदहाली का समाधान अब ‘किस्मत का टिकट’ है? : गोविंद सिंह ठाकुर

मनाली। हिमाचल प्रदेश में लॉटरी व्यवस्था शुरू करने को लेकर पूर्व मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता गोविंद सिंह ठाकुर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि क्या हिमाचल की आर्थिक बदहाली का समाधान अब युवाओं और गरीब परिवारों की जेब से ‘किस्मत का टिकट’ खरीदवाना है? सरकार राजस्व बढ़ाने के लिए रोजगार, निवेश और विकास के स्थायी रास्ते अपनाए, न कि ऐसी व्यवस्था को बढ़ावा दे, जिसे अतीत में सामाजिक दुष्परिणामों के कारण बंद करना पड़ा था।

गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा कि करीब 27 वर्ष बाद हिमाचल में लॉटरी व्यवस्था को दोबारा शुरू करने का निर्णय प्रदेश के व्यापक हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि आर्थिक संकट से जूझ रहे प्रदेश में राजस्व जुटाने के लिए सरकार को ऐसे माध्यम का चयन नहीं करना चाहिए, जिसका सामाजिक और आर्थिक असर सीधे आम परिवारों पर पड़े। सरकार को अपनी आय बढ़ाने के लिए ऐसे विकल्पों पर काम करना चाहिए, जो प्रदेश के विकास और जनता के हित में हों।

उन्होंने कहा कि वर्ष 1999 में तत्कालीन भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने जनहित और सामाजिक दुष्परिणामों को देखते हुए हिमाचल प्रदेश में लॉटरी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था। इसके बाद प्रदेश ने अनेक आर्थिक चुनौतियों का सामना किया, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय राजा वीरभद्र सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की सरकारों ने भी लॉटरी व्यवस्था को दोबारा शुरू नहीं किया।

पूर्व मंत्री ने कहा कि लॉटरी को केवल राजस्व अर्जित करने का माध्यम मानना बेहद चिंताजनक सोच है। इसका असर विशेष रूप से मध्यम एवं निम्न आय वर्ग के परिवारों पर पड़ सकता है। आसान और त्वरित धन प्राप्त करने की चाहत कई लोगों को आर्थिक संकट की ओर धकेल सकती है। अतीत में सामाजिक दुष्परिणामों, आर्थिक नुकसान और धोखाधड़ी जैसी शिकायतों के कारण ही प्रदेश में इस व्यवस्था पर रोक लगाने की आवश्यकता महसूस की गई थी।

गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा कि आज हिमाचल का युवा रोजगार और स्वरोजगार की तलाश में है। प्रदेश के युवाओं को कौशल विकास, स्टार्टअप, उद्यमिता और रोजगार के अवसरों की आवश्यकता है। ऐसे समय में सरकार को युवाओं को मेहनत और नवाचार के रास्ते पर आगे बढ़ाने के बजाय किस्मत के भरोसे त्वरित धन प्राप्त करने वाली व्यवस्था की ओर नहीं धकेलना चाहिए। उन्होंने कहा कि सुख्खू सरकार को प्रदेश की आर्थिक चुनौतियों का समाधान रोजगार, निवेश, उद्योग, पर्यटन और बेहतर वित्तीय प्रबंधन से निकालना चाहिए, न कि आम लोगों की आर्थिक मजबूरियों और उम्मीदों को लॉटरी के टिकट से जोड़ना चाहिए।

ठाकुर ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि राज्य सरकार वित्त विभाग की ओर से जारी ई-टेंडर को तत्काल वापस ले और हिमाचल में सरकारी लॉटरी शुरू करने के प्रस्ताव को पूरी तरह समाप्त करें. उन्होंने कहा कि राजस्व बढ़ाने के लिए ऐसे विकल्प तलाशे जाने चाहिए, जिनका समाज और परिवारों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

📍 Location: KULLU (Kullu)

खबरें और भी हैं...

Copyright © 2025 Dainik Savera Times. All rights reserved.
ऐप खोलें