
शिमला: हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में फीस बढ़ोतरी और भर्ती प्रक्रिया को लेकर स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने भारी बारिश के बीच धरना प्रदर्शन किया। एसएफआई की हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय कैंपस कमेटी ने विश्वविद्यालय प्रशासन के फैसलों का विरोध करते हुए फीस वृद्धि को छात्र विरोधी बताया।
एसएफआई का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने सामान्य फीस, परीक्षा शुल्क, हॉस्टल फीस और अन्य प्रशासनिक शुल्कों में करीब 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। संगठन ने कहा कि एचपीयू की स्थापना दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को सस्ती और बेहतर शिक्षा उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से की गई थी, लेकिन बढ़ी हुई फीस से कई छात्र उच्च शिक्षा से दूर हो सकते हैं।
प्रदर्शन के दौरान एसएफआई नेताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय में कई अन्य शुल्कों में भी भारी वृद्धि की गई है। इनमें पुनर्मूल्यांकन फीस, थीसिस जमा करने का शुल्क, प्रोजेक्ट मूल्यांकन, डिग्री और माइग्रेशन प्रमाण पत्र से जुड़े शुल्क शामिल हैं। संगठन ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में इन शुल्कों में 100 से 200 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है।
एसएफआई ने कहा कि विश्वविद्यालय की आर्थिक समस्याओं का समाधान छात्रों पर अतिरिक्त शुल्क लगाकर नहीं किया जाना चाहिए। संगठन ने राज्य सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन से वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाने और फीस वृद्धि के फैसले को वापस लेने की मांग की।
एसएफआई ने मांग की है कि बढ़ाई गई शैक्षणिक, परीक्षा, हॉस्टल और प्रशासनिक फीस को तुरंत वापस लिया जाए। साथ ही विश्वविद्यालय के वित्तीय प्रबंधन को लेकर पारदर्शिता लाने के लिए सरकार से रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग भी की गई।
संगठन ने चेतावनी दी कि अगर फीस वृद्धि का फैसला वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। एसएफआई ने हस्ताक्षर अभियान, प्रशासनिक अधिकारियों के घेराव, धरना और अन्य चरणबद्ध आंदोलनों की घोषणा की है।