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जनजातीय गौरव दिवस के उपलक्ष्य में उपायुक्त कार्यालय शिमला में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित

शिमला। जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम में उनके अतुलनीय योगदान, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत तथा सामाजिक-आर्थिक विकास के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आज उपायुक्त कार्यालय शिमला में जनजातीय गौरव दिवस के उपलक्ष्य में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने दीप प्रज्वलित कर कार्यशाला का शुभारम्भ किया। जनजातीय गौरव दिवस के उपलक्ष में 1 नवंबर से 15 नवंबर तक प्रतिदिन विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जानी प्रस्तावित हैं।

उन्होंने बताया कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य जनजातीय समुदायों के ऐतिहासिक योगदान, उनके अधिकारों, परंपराओं, सांस्कृतिक पहचान तथा उनके सर्वांगीण विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करना और समाज के व्यापक वर्गों को इस विषय के प्रति जागरूक करना रहा। जनजातीय गौरव दिवस प्रत्येक वर्ष 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2021 में इस दिन को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में घोषित किया गया था। भगवान बिरसा मुंडा ने ब्रिटिश शासन के शोषणकारी तंत्र के विरुद्ध संघर्ष करते हुए जनजातीय समाज में स्वाभिमान, एकता और अधिकारों के प्रति चेतना का संचार किया। उनके नेतृत्व में संचालित उलगुलान आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में जनजातीय समाज के साहस और संघर्ष का महत्वपूर्ण प्रतीक है।

उपायुक्त ने कहा कि जनजातीय गौरव दिवस मनाने का उद्देश्य केवल जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को स्मरण करना ही नहीं, बल्कि देश के इतिहास, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण में जनजातीय समुदायों के महत्वपूर्ण योगदान को उचित सम्मान एवं पहचान दिलाना भी है। यह दिवस जनजातीय समाज की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों, लोक कलाओं, भाषाओं, रीति-रिवाजों और प्रकृति के साथ उनके गहरे जुड़ाव को समझने तथा संरक्षित करने का अवसर प्रदान करता है।

शिमला जिला के संदर्भ में भी इस दिवस का विशेष महत्व है। जिला के दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय समुदाय हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता और पारंपरिक विरासत को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेष रूप से डोडरा-क्वार जैसे दुर्गम क्षेत्रों की विशिष्ट सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान, पारंपरिक जीवनशैली, लोक परंपराएं और प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन स्थानीय विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, संचार, आजीविका और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार समावेशी एवं संतुलित विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखते हुए उन्हें शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार, स्वरोजगार और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध करवाना आवश्यक है। इस दिशा में जनजातीय गौरव दिवस जनजातीय समाज की आकांक्षाओं, चुनौतियों और विकास की संभावनाओं पर विचार-विमर्श करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।

कार्यशाला के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जनजातीय समाज का सम्मान, उनकी सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण तथा विकास की मुख्यधारा में उनकी समान भागीदारी सुनिश्चित करना सामूहिक जिम्मेदारी है। साथ ही, नई पीढ़ी को जनजातीय नायकों के संघर्ष और बलिदान से परिचित करवाना भी आवश्यक है, ताकि देश की विविधतापूर्ण सांस्कृतिक विरासत और स्वतंत्रता संग्राम के गौरवशाली इतिहास के प्रति सम्मान की भावना विकसित हो सके।

जनजातीय गौरव दिवस का मूल संदेश जनजातीय समाज के गौरवशाली अतीत का सम्मान करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए समान अवसर, सम्मान और समावेशी विकास सुनिश्चित करना है। कार्यशाला के दौरान 15 नवंबर तक प्रतिदिन आयोजित होने वाली विभिन्न गतिविधियों को आयोजित करने को लेकर भी विस्तृत चर्चा की गई। कार्यशाला में जिला योजना अधिकारी डॉ निवेदिता सहित उपायुक्त कार्यालय के अन्य अधिकारी व कर्मचारी भी उपस्थित रहे।

📍 Location: शिमला (शिमला)

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