
शिमला : ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन में इस बार शिमला की सड़कों पर वाहनों का ऐसा दबाव पड़ा कि शहर कई बार जाम के आगे बेबस नजर आया। मई से जुलाई के शुरुआती दिनों तक करीब 22 लाख वाहनों की एंट्री ने यह साफ कर दिया कि राजधानी की सड़कें अब अपनी क्षमता से कहीं अधिक बोझ उठा रही हैं। रोजाना शहर के प्रमुख मार्गों पर लंबी-लंबी वाहन कतारें देखने को मिलीं और स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों को भी घंटों जाम में फंसना पड़ा। शिमला पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक मई में 8.5 लाख, जून में 10.5 लाख और जुलाई के शुरुआती दिनों तक करीब 3 लाख वाहन शहर पहुंचे।
सबसे अधिक दबाव जून में रहा, जब वीकेंड और छुट्टियों के दौरान शहर की लगभग हर प्रमुख सड़क पर जाम की स्थिति बनी रही। हालांकि पुलिस ने ट्रैफिक व्यवस्था संभालने के लिए अतिरिक्त जवान तैनात किए और कई वैकल्पिक व्यवस्थाएं लागू कीं, लेकिन हकीकत यह रही कि ढली, संजौली, लक्कड़ बाजार, विक्ट्री टनल, छोटा शिमला, न्यू शिमला, बालूगंज और कार्ट रोड जैसे कई इलाकों में लोगों को रोजाना ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ा।
कई बार कुछ किलोमीटर का सफर तय करने में एक घंटे से अधिक समय लग गया। बता दे कि राजधानी में हर साल पर्यटकों और वाहनों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन सड़क नेटवर्क में उसी अनुपात में विस्तार नहीं हो पाया है। पार्किंग की कमी, संकरी सड़कें और बढ़ते निजी वाहन ट्रैफिक जाम की सबसे बड़ी वजह बन रहे हैं। पर्यटन सीजन में हालात और बिगड़ जाते हैं।