हिमाचल प्रदेश डेस्कः इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (IGMC) शिमला में मरीज और डॉक्टर के बीच हुई झड़प के मामले में राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रारंभिक जांच और तथ्यात्मक रिपोर्ट के आधार पर पल्मोनरी मेडिसिन विभाग में तैनात सीनियर रेजिडेंट डॉ. राघव निरुला की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं। चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशक ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को मामले की 24 घंटे के भीतर जांच रिपोर्ट तलब की थी। उसी रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। जांच समिति की रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया है कि इस घटना के लिए दोनों पक्ष मरीज और सीनियर रेजिडेंट जिम्मेदार हैं। रिपोर्ट में इसे कदाचार, दुर्व्यवहार, अनुचित आचरण और लोक सेवक के लिए अशोभनीय कृत्य करार देते हुए रेजिडेंट डॉक्टर नीति-2025 के उल्लंघन का मामला बताया गया है। इन तथ्यों के आधार पर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशक ने रेजिडेंट डॉक्टर नीति-2025 की धारा-9 के तहत डॉ. राघव निरुला की सीनियर रेजिडेंट पद से सेवाएं समाप्त करने के आदेश जारी किए।
क्या है मामला
निदेशक की ओर से जारी आदेश के अनुसार, 22 दिसंबर 2025 को आईजीएमसी शिमला की अनुशासनात्मक जांच समिति की प्रारंभिक रिपोर्ट प्राप्त हुई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि 36 वर्षीय मरीज अर्जुन और डॉ. राघव निरुला के बीच अस्पताल परिसर में हाथापाई हुई थी। घटना के बाद मरीज के परिजनों ने डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी, जिसकी जांच पुलिस कर रही है।
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट और घटना के वायरल वीडियो क्लिप के आधार पर डॉ. राघव निरुला को 22 दिसंबर 2025 को ही रेजिडेंट डॉक्टर नीति-2025 की धारा-9 के तहत सीनियर रेजिडेंसी से निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद 23 दिसंबर को सरकार ने एक उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की, जिसे 72 घंटे में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए थे।
मुख्यमंत्री ने समिति को 24 दिसंबर तक रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे। समिति ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी। बुधवार शाम को आदेश की प्रतिलिपि स्वास्थ्य सचिव, निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं, आईजीएमसी के प्रधानाचार्य और चिकित्सा अधीक्षक को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी गई।
जयराम ठाकुर ने की घटना की निंदा
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने आईजीएमसी में हुई मारपीट की घटना की निंदा की। उन्होंने कहा कि डॉक्टर का पेशा बेहद सम्मानजनक है और ऐसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए। मरीज अक्सर तनाव में होते हैं, ऐसे में डॉक्टरों को धैर्य से काम लेना चाहिए। वायरल वीडियो को लेकर उन्होंने कहा कि शालीन भाषा और व्यवहार सभी के लिए जरूरी है, यही हमारी संस्कृति है।
सेमडिकोट ने जताया विरोध, आंदोलन की चेतावनी
आईजीएमसी मारपीट मामले में आरडीए के बाद स्टेट एसोसिएशन ऑफ मेडिकल एंड डेंटल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन (सेमडिकोट) भी आरोपी डॉक्टर के समर्थन में उतर आई है। सेमडिकोट ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग से निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही अस्पताल परिसर में भीड़ को उकसाने और प्रदर्शन का नेतृत्व करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी की है। सेमडिकोट ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।