Site icon Dainik Savera Times

Shimla: एचपीयू परिसर में संचालित अवैध ढाबे हटाए, संचालकों और पुलिस में धक्का-मुक्की

HPU Shimla

HPU Shimla

हिमाचल डेस्कः हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) प्रशासन ने शनिवार को पुलिस और जिला प्रशासन के सहयोग से विश्वविद्यालय परिसर में अवैध रूप से संचालित ढाबों और अस्थायी ढांचों को हटाने की कार्रवाई की। इस दौरान ढाबा संचालकों ने सीटू के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा के नेतृत्व में मौके पर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों और पुलिस-प्रशासन के बीच तीखी बहस हुई, जिससे कुछ समय के लिए स्थिति तनावपूर्ण हो गई और धक्का-मुक्की की नौबत भी आई।

ये भी देखें :-

प्रदर्शन कर रहे ढाबा संचालकों ने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई से उनकी रोजी-रोटी छीनी जा रही है और बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के उन्हें हटाया जा रहा है। सीटू प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने कहा कि पहले विश्वविद्यालय स्तर पर यह संकेत दिए गए थे कि वेंडरों और ढाबा संचालकों के लिए कोई नीति बनाई जा सकती है और किराया लेकर उन्हें नियमित करने पर विचार होगा, लेकिन अचानक सख्त कदम उठाते हुए यह कार्रवाई कर दी गई। उन्होंने कहा कि वर्षों से यहां काम कर रहे लोगों के साथ इस तरह का व्यवहार न्यायसंगत नहीं है और इससे कई परिवारों की आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा।

वहीं, एचपीयू प्रशासन के अनुसार खसरा नंबर 175 और आसपास के क्षेत्रों में लंबे समय से किए गए अतिक्रमण को हटाने के लिए यह संयुक्त अभियान चलाया गया। कार्रवाई के दौरान कई अवैध ढांचों को हटाकर क्षेत्र को खाली कराया गया। विश्वविद्यालय के एस्टेट कार्यालय का कहना है कि यह भूमि एचपीयू की संपत्ति है, जहां बिना अनुमति व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। प्रशासन के मुताबिक संबंधित पक्षों को पहले भी नोटिस जारी किए गए थे और स्वेच्छा से कब्जा हटाने के लिए समय दिया गया था, लेकिन तय अवधि के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाया गया। इसके चलते नियमों के तहत बलपूर्वक कार्रवाई का निर्णय लिया गया।

अभियान के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की तैनाती की गई थी और जिला प्रशासन की टीम भी मौके पर मौजूद रही। अधिकारियों के अनुसार कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से पूरी की गई और किसी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय परिसर की भूमि को शैक्षणिक और संस्थागत आवश्यकताओं के लिए सुरक्षित रखना प्राथमिकता है और भविष्य में किसी भी प्रकार के अतिक्रमण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हटाए गए क्षेत्रों की निगरानी के लिए संबंधित विभागों को निर्देश भी जारी किए गए हैं।

ये भी पढे़ं :-

Exit mobile version