शिमला : भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) शिमला जिला कमेटी ने नगर निगम शिमला द्वारा जनता के लिए पानी की दरों में 8 प्रतिशत बढ़ोतरी किए जाने का कड़ा विरोध किया है। पार्टी ने इसे शिमला की आम जनता पर लगातार बढ़ते आर्थिक बोझ को और बढ़ाने वाला जनविरोधी फैसला करार देते हुए पानी की दरों में की गई बढ़ोतरी को तुरंत वापस लेने की मांग की है।
माकपा शिमला जिला कमेटी सचिव विजेंद्र मेहरा, शिमला लोकल कमेटी सचिव जगत राम व कुसुंपटी लोकल कमेटी सचिव जयशिव ठाकुर ने कहा कि शिमला की जनता पहले ही महंगाई, बेरोजगारी, बढ़ते प्रॉपर्टी टैक्स, कूड़े की भारी दरों, बिजली-पानी सहित आवश्यक सेवाओं की महंगी होती दरों से परेशान है। ऐसे समय में पेयजल जैसी बुनियादी और जीवन की आवश्यक जरूरत की कीमत में 8 प्रतिशत बढ़ोतरी करना जनता के हितों के खिलाफ है।
पानी कोई विलासिता की वस्तु नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक का मौलिक और आवश्यक जीवनाधिकार है। इसलिए इसकी कीमतों को लगातार बढ़ाकर जनता पर आर्थिक बोझ डालना किसी भी रूप में उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि नगर निगम शिमला और शिमला जल प्रबंधन निगम द्वारा पिछले कुछ वर्षों से पानी की दरों में लगातार 10 प्रतिशत की वार्षिक बढ़ोतरी की जाती रही है। इस लगातार वृद्धि के कारण आम उपभोक्ताओं के पानी के बिलों में भारी इजाफा हुआ है।
अब वर्तमान में 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद भी जनता को राहत देने के बजाय आगामी वर्ष 2027 में पानी की दरों में 6 प्रतिशत और बढ़ोतरी का प्रावधान किया जा रहा है। इसका स्पष्ट अर्थ है कि आने वाले समय में भी शिमला की जनता को लगातार बढ़ते पानी के बिलों का बोझ उठाना पड़ेगा।
विजेंद्र मेहरा ने कहा कि एक ओर नगर निगम शिमला जनता से विभिन्न प्रकार के टैक्स और शुल्क लगातार बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं की कीमतें भी बढ़ाई जा रही हैं। यह नीति आम जनता की जेब पर दोहरा हमला है। नगर निगम और जल प्रबंधन निगम को मुनाफे अथवा राजस्व बढ़ाने के बजाय जनता को सस्ती, नियमित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पानी की दरों में लगातार बढ़ोतरी का सबसे अधिक असर मजदूरों, कर्मचारियों, छोटे दुकानदारों, मध्यम वर्ग, पेंशनभोगियों तथा कम आय वाले परिवारों पर पड़ रहा है।
जिन परिवारों की आय सीमित है, उनके घरेलू बजट का बड़ा हिस्सा पहले ही खाद्य पदार्थों, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, परिवहन और अन्य आवश्यक खर्चों में चला जाता है। ऐसे में पानी के बिलों में लगातार वृद्धि उनके लिए गंभीर आर्थिक समस्या पैदा कर रही है। माकपा नेता ने कहा कि नगर निगम शिमला और शिमला जल प्रबंधन निगम जनता को यह स्पष्ट करें कि पानी की दरों में हर वर्ष बढ़ोतरी की आवश्यकता क्यों पड़ रही है और बढ़ी हुई दरों से प्राप्त अतिरिक्त राशि का इस्तेमाल किस प्रकार किया जा रहा है।
पानी की आपूर्ति व्यवस्था में होने वाले खर्च, राजस्व और व्यय का पूरा हिसाब जनता के सामने सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिमला शहर की जनता को पर्याप्त और नियमित पेयजल उपलब्ध करवाना नगर निगम और संबंधित जल प्रबंधन संस्था की जिम्मेदारी है। इसके लिए सरकार को आवश्यक आर्थिक सहायता उपलब्ध करवानी चाहिए। सार्वजनिक सेवाओं का आर्थिक बोझ सीधे जनता पर डालकर अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटना चाहिए।
विजेंद्र मेहरा ने चेतावनी दी कि यदि पानी की दरों में की गई 8 प्रतिशत बढ़ोतरी वापस नहीं ली गई तथा आगामी वर्ष 2027 में प्रस्तावित 6 प्रतिशत बढ़ोतरी को रद्द नहीं किया गया तो भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) शिमला की जनता को लामबंद कर व्यापक जनांदोलन शुरू करेगी। पार्टी इस मुद्दे को लेकर वार्ड स्तर से लेकर शहर स्तर तक जनता के बीच जाएगी तथा पानी की बढ़ी दरों के खिलाफ जनसभाएं, प्रदर्शन और अन्य लोकतांत्रिक आंदोलन आयोजित करेगी।
उन्होंने शिमला की जनता से आह्वान किया कि पानी जैसी बुनियादी सुविधा को महंगा किए जाने के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाएं। माकपा ने स्पष्ट किया कि जनता के अधिकारों और सार्वजनिक सेवाओं की रक्षा के लिए पार्टी हर स्तर पर संघर्ष करेगी और पानी की दरों में की गई बढ़ोतरी को वापस करवाने के लिए निर्णायक जनसंघर्ष चलाया जाएगा।
📍 Location: शिमला (शिमला)

