शिमला। राजधानी शिमला में बढ़ते बंदरों और आवारा कुत्तों के आतंक के खिलाफ अब शिमला नागरिक सभा ने मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को नागरिक सभा के पदाधिकारियों और सदस्यों ने उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने शहर में बंदरों और आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताते हुए समस्या के स्थायी समाधान की मांग उठाई।
शिमला नागरिक सभा का कहना है कि शहर में आए दिन लोगों को बंदरों और आवारा कुत्तों के हमलों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों में इनका डर बना हुआ है। कई लोग कुत्तों के काटने से घायल हो चुके हैं, जबकि बंदरों के झुंड भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है, लेकिन प्रशासन की ओर से इसका स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है।

नागरिक सभा ने मांग की कि बंदरों और आवारा कुत्तों के हमलों में घायल होने वाले लोगों को उचित मुआवजा दिया जाए। सभा ने पीड़ितों के लिए कम से कम पांच लाख रुपये मुआवजा देने की मांग रखी। साथ ही गंभीर रूप से घायल लोगों के उपचार का खर्च भी प्रशासन द्वारा उठाने की मांग की गई।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि शिमला शहर की सीमित आबादी और संसाधनों को देखते हुए बंदरों और आवारा कुत्तों के लिए शहर से बाहर उचित स्थान पर बसाने अथवा प्रबंधन की व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से नसबंदी, टीकाकरण और पशु नियंत्रण की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने की भी मांग की। नागरिक सभा ने चेतावनी दी कि यदि समस्या के समाधान के लिए जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
📍 Location: शिमला (शिमला)