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शिमला: मशोबरा स्कूल में आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण, 250 से अधिक विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा

शिमला। हिमाचल प्रदेश जैसे आपदा संभावित पहाड़ी राज्य में प्राकृतिक आपदाओं से बचाव और नुकसान को कम करने के लिए जागरूकता और पूर्व तैयारी बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत मेरा युवा भारत (MY Bharat), शिमला की ओर से मंगलवार को राजकीय मॉडल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, मशोबरा में अंतरराष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस 2026 का आयोजन किया गया। विद्यालय के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में 250 से अधिक छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और आपदा के समय अपनी तथा दूसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के व्यावहारिक तरीके सीखे।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को आपदा प्रबंधन, सुरक्षा उपायों और आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई के प्रति जागरूक करना था। हिमाचल प्रदेश में भूकंप, भूस्खलन, अचानक बाढ़ और जंगल की आग जैसी आपदाओं के जोखिम को देखते हुए विद्यार्थियों को विशेष रूप से तैयार रहने का संदेश दिया गया।

विद्यालय की प्रधानाचार्य श्रीमती मीनाक्षी सूद ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने कहा कि आपदाओं के दौरान जान-माल के नुकसान को कम करने के लिए जागरूकता और पहले से की गई तैयारी सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे स्वयं सीखी गई जानकारियों को अपने परिवार और आसपास के लोगों तक पहुंचाएं तथा सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।

मेरा युवा भारत, शिमला के उपनिदेशक विपिन कुमार ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए आपदा जोखिम न्यूनीकरण में युवाओं और MY Bharat स्वयंसेवकों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने सामुदायिक स्तर पर आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

होमगार्ड विशेषज्ञों ने दी आपदा प्रबंधन की जानकारी

हिमाचल प्रदेश होमगार्ड तृतीय वाहिनी के प्लाटून हवलदार मनोज कुमार और रमेश ठाकुर ने तकनीकी सत्रों के माध्यम से विद्यार्थियों को प्राकृतिक एवं मानव निर्मित आपदाओं से निपटने के तरीके बताए। उन्होंने भूकंप, भूस्खलन और आग लगने जैसी घटनाओं के दौरान अपनाए जाने वाले सुरक्षा उपायों, आपातकालीन किट, निकासी योजना और सामुदायिक प्रथम प्रतिक्रियाकर्ताओं की भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

प्रशिक्षकों ने बताया कि आपदा के समय घबराने के बजाय सूझबूझ से काम लेना, समय पर निर्णय लेना और एक-दूसरे के साथ समन्वय बनाए रखना बेहद जरूरी है। आपदा आने के बाद राहत कार्य करने के साथ-साथ पहले से जोखिम कम करने और सुरक्षा उपायों की जानकारी रखना भी आवश्यक है।

मॉक ड्रिल में सीखी सुरक्षित निकासी की तकनीक

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण भूकंप सुरक्षा और सुरक्षित निकासी पर आधारित लाइव मॉक ड्रिल रही। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को भूकंप के दौरान ‘झुको, ढको और पकड़ो’ तकनीक का अभ्यास करवाया गया। साथ ही कक्षाओं से चिन्हित निकास मार्गों के जरिए सुरक्षित बाहर निकलने, मानव श्रृंखला बनाने और घायल व्यक्ति को अस्थायी स्ट्रेचर की मदद से ले जाने का प्रशिक्षण दिया गया।

विद्यार्थियों को प्राथमिक चिकित्सा, भीड़ प्रबंधन और आपातकालीन स्थिति में घायलों की सहायता करने के तरीके भी समझाए गए। इसके अतिरिक्त बिजली और गैस की आपूर्ति बंद करने, अग्निशामक यंत्रों के इस्तेमाल तथा प्रभावित लोगों को मनोवैज्ञानिक प्राथमिक सहायता देने के बारे में जानकारी दी गई। इस व्यावहारिक अभ्यास से विद्यार्थियों को वास्तविक आपातकालीन परिस्थितियों में अपनाए जाने वाले सुरक्षा उपायों को समझने और उनका अभ्यास करने का अवसर मिला। इसका उद्देश्य संकट की घड़ी में उनकी घबराहट कम करना और आत्मविश्वास बढ़ाना था।

आपदा-प्रतिरोधी समाज बनाने की ली शपथ

कार्यक्रम के अंत में 250 से अधिक छात्र-छात्राओं ने अपने विद्यालय और गांव को आपदा-प्रतिरोधी बनाने के लिए जागरूकता फैलाने तथा आपदा प्रबंधन के प्रयासों में प्रशासन का सहयोग करने की शपथ ली। मेरा युवा भारत, शिमला के राष्ट्रीय युवा स्वयंसेवक तरुण शर्मा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इस दौरान मुख्य अतिथि और प्रशिक्षकों को सम्मान स्वरूप प्रतीक चिह्न भेंट किए गए।

कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि आपदा से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए केवल प्रशासनिक तैयारियां ही नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जागरूकता, प्रशिक्षण और सामुदायिक सहभागिता भी महत्वपूर्ण है।

📍 Location: शिमला (शिमला)

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