शिमला। हिमाचल के बागवानों के लिए इस बार सेब की कम फसल पहले ही बड़ी चिंता बनी हुई है। कई क्षेत्रों में सेब का आकार छोटा रहने से बागवानों को खरीद कीमत में भी भारी अंतर का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने बड़े खरीदारों की खरीद व्यवस्था पर तीखे सवाल उठाए हैं।
राठौर ने शनिवार को शिमला से जारी एक बयान में कहा कि जब बागवान की फसल पहले ही रिकॉर्ड निचले स्तर पर है, तब उसकी मजबूरी का फायदा उठाना किसी भी सूरत में उचित नहीं है। उन्होंने छोटे आकार के सेब की कीमत बड़े सेब के मुकाबले लगभग आधी किए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि बागवान को कम कीमत दी जा रही है तो इसका लाभ उपभोक्ता तक उसी अनुपात में क्यों नहीं पहुंच रहा।
उन्होंने कहा कि सवाल यह नहीं है कि छोटे आकार के सेब की कीमत कम क्यों है। असली सवाल यह है कि कीमत में कमी का सबसे बड़ा बोझ बागवान ही क्यों उठाए? कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता राठौर ने कहा है कि बागवान महीनों तक बर्फ, बारिश और मौसम की मार झेलकर बगीचे में पसीना बहाता है। पेड़ पर फल आने तक वह अपनी जमा-पूंजी, मेहनत और उम्मीदें लगा देता है। खाद, दवाइयों, मजदूरी और ढुलाई का खर्च उठाता है। इसके बाद जब सेब पेटियों में भरकर मंडी या खरीद केंद्र तक पहुंचता है तो उसकी मेहनत की कीमत तय करने की ताकत उसके हाथ में नहीं रहती।
उन्होंने कहा कि चंद लोग लाखों बागवान कि मेहनत का हिसाब नहीं लगा सकते। पूछा है कि ज़ब पेड़ बागवान का, मेहनत बागवान की, जोखिम बागवान का और खर्च भी बागवान का फिर उसकी उपज की कीमत तय करने में उसकी आवाज इतनी कमजोर क्यों ? राठौर ने कहा कि कम फसल वाले इस साल में बागवान पहले ही आर्थिक दबाव में है। ऐसे समय में खरीद कीमतों में मनमाना अंतर उसकी मुश्किलें और बढ़ा सकता है।
उन्होंने कहा कि बागवानों को किसी की कृपा नहीं, बल्कि अपनी मेहनत और उपज का न्यायसंगत मूल्य चाहिए।उन्होंने अडानी समेत बड़े कॉरपोरेट खरीदारों से भी पारदर्शी मूल्य निर्धारण सुनिश्चित करने की मांग की। राठौर ने कहा कि बड़ी कंपनियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बागवान को उसकी उपज का उचित हिस्सा मिले। उन्होंने कहा है कि हिमाचल का सेब कारोबार केवल व्यापार नहीं है, बल्कि हजारों बागवान परिवारों की आजीविका और वर्षों की मेहनत का आधार है। इसलिए बाजार की ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिसमें किसान सबसे कमजोर कड़ी न बने।
एक-दो खरीदारों पर निर्भरता खत्म हो
राठौर ने सरकार से ऐसी व्यवस्था तैयार करने की मांग की, जिसमें बागवान एक-दो बड़े खरीदारों पर निर्भर न रहें। उन्होंने कहा कि सेब खरीद में प्रतिस्पर्धा बढ़नी चाहिए और बागवानों के पास अपनी उपज बेचने के लिए पर्याप्त विकल्प होने चाहिए।
कीमतों की निगरानी की मांग
राठौर ने बागवान सहकारी समितियों को मजबूत करने, खरीद कीमतों को सार्वजनिक करने और खेत से खुदरा बाजार तक कीमतों की निगरानी की मांग की। उनका कहना है कि बागवान से जिस कीमत पर सेब खरीदा जाता है और उपभोक्ता तक जिस कीमत पर पहुंचता है, उसके बीच के अंतर को पारदर्शी बनाया जाना चाहिए।
मार्केटिंग बोर्ड को निभानी होगी जिम्मेदारी
राठौर ने हिमाचल प्रदेश मार्केटिंग बोर्ड की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि बोर्ड केवल दर्शक बनकर नहीं रह सकता। उसे बागवानों के हितों की रक्षा के लिए खरीद और विपणन व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
📍 Location: शिमला (शिमला)

