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ग्रामीण विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अधिकारियों को नियमों की स्पष्ट जानकारी जरूरी : अनिरुद्ध सिंह

शिमलाः राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन एवं ग्रामीण विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं के प्रभावी एवं त्वरित क्रियान्वयन के उद्देश्य से डॉ. मनमोहन सिंह हिमाचल प्रदेश लोक प्रशासनिक संस्थान, फेयरलॉन (एमसिप्पा) में छह जिलों के जिला विकास अधिकारियों एवं खंड विकास अधिकारियों के लिए दो दिवसीय राज्य स्तरीय ओरिएंटेशन कार्यशाला आज आरंभ हुई। कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की।

इस अवसर पर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री ने कहा कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य भारत सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा जनकल्याण के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही समस्याओं का समाधान करना तथा अधिकारियों को योजनाओं, नियमों एवं प्रक्रियाओं की अद्यतन जानकारी प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की लगभग 90 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है।

ऐसे में योजनाओं एवं नियमों की पर्याप्त जानकारी के अभाव में ग्रामीण क्षेत्रों और पंचायत स्तर पर विकास कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को विभागीय योजनाओं एवं उनके नियमों की स्पष्ट जानकारी होना आवश्यक है, ताकि विकास कार्यों के क्रियान्वयन में अनावश्यक बाधाएं न आएं और उपलब्ध बजट का समुचित उपयोग सुनिश्चित हो सके।

हिम ई-पंचायत से पंचायत बैठकों में बढ़ेगी पारदर्शिता

अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि 25 सितंबर को आयोजित ओरिएंटेशन कार्यशाला के दौरान हिम ई-पंचायत प्रोसिडिंग सिस्टम पोर्टल लॉन्च किया गया था। इस पोर्टल के माध्यम से ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों तथा जिला परिषदों की बैठकों की कार्यवाही ऑनलाइन की जाएगी। इससे बैठकों की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा विभागीय रिकॉर्ड को सुरक्षित एवं व्यवस्थित रूप से डिजिटल रूप में रखने में सहायता मिलेगी।

उन्होंने कहा कि हिम ई-पंचायत पोर्टल के माध्यम से पंचायत प्रतिनिधियों से लेकर राज्य स्तर तक के अधिकारी हिम एक्सेस के जरिए पंचायत, पंचायत समिति (बीडीसी) एवं जिला परिषद की बैठकों का एजेंडा, बैठक का विवरण तथा कार्यवाही ऑनलाइन अपडेट कर सकेंगे। इससे भौतिक रिकॉर्ड पर निर्भरता कम होगी और बैठकों से संबंधित महत्वपूर्ण डाटा डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा जा सकेगा।

मंत्री ने कहा कि अधिकारियों को नियमों की पर्याप्त जानकारी न होने के कारण कई बार बजट का समुचित उपयोग नहीं हो पाता। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष भी ग्रामीण विकास विभाग के अधीन पंचायतें करीब 12 हजार करोड़ रुपये की राशि खर्च नहीं कर पाईं। उन्होंने अधिकारियों से आह्वान किया कि योजनाओं के नियमों एवं प्रक्रियाओं की जानकारी हासिल कर विकास कार्यों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करें।

विकसित भारत-जी राम जी’ के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री ने ‘विकसित भारत-जी राम जी’ योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए योजनाओं का सही एवं प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है। उन्होंने ग्रामीण विकास विभाग की ओर से आयोजित ओरिएंटेशन कार्यशाला के लिए चार दिन की अनुमति प्रदान करने के लिए एमसिप्पा के निदेशक का आभार व्यक्त किया।

शेष छह जिलों के अधिकारियों को दिया जा रहा प्रशिक्षण

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के निदेशक राघव शर्मा ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए कहा कि विभाग द्वारा अधिकारियों को योजनाओं की जानकारी एवं प्रशिक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से वर्ष 2024 में भी इस प्रकार की कार्यशाला आयोजित की गई थी। उन्होंने बताया कि 25 एवं 26 सितंबर को छह जिलों के अधिकारियों को विभाग की विभिन्न योजनाओं के संबंध में अद्यतन जानकारी एवं आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इसी क्रम में आज से आरंभ हुई दूसरी दो दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यशाला में शेष छह जिलों के जिला विकास अधिकारियों एवं खंड विकास अधिकारियों को प्रशिक्षण के लिए आमंत्रित किया गया है।

कार्यशाला के दौरान अधिकारियों को ग्रामीण विकास विभाग, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन तथा अन्य संबंधित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, नियमों एवं प्रक्रियाओं की जानकारी प्रदान की जाएगी। इस अवसर पर निदेशक ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग राघव शर्मा, निदेशक एमसिप्पा रुपाली ठाकुर, अतिरिक्त निदेशक प्रशांत सरकैक, हिमाचल प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुरेंद्र मोहन सहित विभिन्न जिलों के जिला विकास अधिकारी, खंड विकास अधिकारी तथा अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

📍 Location: शिमला (शिमला)

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