रामपुर बुशहर: अंतरराष्ट्रीय लवी मेले से पहले रामपुर बुशहर में चल रही अश्व प्रदर्शनी में आज का दिन खास रहा। लाहौल-स्पीति से आए चेरिंग डेंडुप के घोड़े ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। स्पीति नस्ल के इस घोड़े को उत्तराखंड से आए एक व्यापारी ने 84,000 की बोली लगाकर खरीद लिया। यह अब तक प्रदर्शनी में बिकी सबसे महंगे घोड़ों में से एक है।
प्रदर्शनी में हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों से लेकर लाहौल-स्पीति, किनौर और कुल्लू , मंडी तक के प्रजनकों ने अपने घोड़े प्रदर्शित किए हैं। अभी तक करीब 65 घोड़ों का पंजीकरण हो चुका है, जिनमें से कई दुर्लभ नस्लों के हैं। लोगों में सबसे अधिक आकर्षण स्पीति नस्ल के घोड़ों को लेकर देखा जा रहा है।
स्पीति नस्ल के घोड़े अपनी सहनशक्ति, तेजी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में काम करने की क्षमता के लिए प्रसिद्ध हैं। ऊंचाई वाले ठंडे इलाकों में पले-बढ़े ये घोड़े बर्फीले रास्तों पर भी सहजता से चल सकते हैं। इनकी चाल तेज होती है और ये लंबे समय तक बिना थके सफर तय कर सकते हैं। यही कारण है कि इनकी मांग हर साल प्रदर्शनी में बनी रहती है।
चेरिंग डेंडुप का कहना है कि उनका यह घोड़ा दो वर्ष का है और विशेष रूप से पारंपरिक तरीके से प्रशिक्षित किया गया है। उन्होंने बताया कि यह घोड़ा न केवल मजबूत है, बल्कि अपनी आज्ञाकारिता और स्वभाव के कारण भी सबका प्रिय बन गया है। घोड़े की सुंदरता और चाल ने खरीदारों को प्रभावित किया, जिसके चलते इसकी बोली तेजी से बढ़ी और आखिरकार 84,000 पर जाकर थमी।
इस आयोजन से स्थानीय पशुपालकों को अपने पशुओं की बिक्री और नस्ल सुधार के लिए एक मंच मिल रहा है। प्रदर्शनी में अगले दो दिनों तक खरीद-फरोख्त और प्रतिस्पर्धात्मक कार्यक्रम जारी रहेंगे।
वहीं पशुपालन विभाग के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ अनिल शर्मा ने बताया कि लाहौल स्पीति से चामुर्थी घोड़े पहुंच चुके है। उन्होंने बताया कि आज रविवार को किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें विभिन्न जानकारियां प्रदान की गई।
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मेष: दिन शुभ रहेगा...