
शिमला: हिमाचल प्रदेश में प्री-प्राइमरी शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने और नौनिहालों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से समग्र शिक्षा की ओर से मुख्य संसाधन समूह (KRPs) की पांच दिवसीय राज्य स्तरीय क्षमता निर्माण कार्यशाला आयोजित की जा रही है। यह कार्यशाला हिमाचल प्रदेश एग्रीकल्चर को-ऑपरेटिव स्टाफ ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (ACSTI), सांगटी, समरहिल शिमला में आयोजित हो रही है। कार्यशाला के पहले चरण में शिमला, सिरमौर, सोलन, किन्नौर, मंडी और लाहौल-स्पीति जिलों के संसाधन समूहों तथा जिला समन्वयकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
कार्यशाला में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) के तहत 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की विकासात्मक जरूरतों और मस्तिष्क के विकास की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया जा रहा है कि बच्चों को उनकी उम्र, रुचि और क्षमता के अनुरूप सीखने के अवसर उपलब्ध करवाए जाएं, ताकि उनकी शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, भाषाई, सामाजिक और भावनात्मक क्षमताओं का बेहतर विकास हो सके।
खेल और गतिविधियों से सीखने पर विशेष जोर
कार्यशाला में बच्चों को पारंपरिक तरीके के बजाय खेल और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से शिक्षा देने की तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें मुक्त खेल (Free Play), कहानी-कथन, रचनात्मक गतिविधियों और अनुभवात्मक अधिगम को शिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसके अलावा ‘हिमवाटिका’ प्लानर के तहत हिमवाटिका किट के प्रभावी इस्तेमाल की जानकारी भी दी जा रही है, ताकि प्री-प्राइमरी कक्षाओं का वातावरण बच्चों के लिए अधिक रोचक, सहज और आनंददायक बनाया जा सके।
बच्चों को शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध करवाने के लिए विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान और उनकी शैक्षणिक जरूरतों पर भी विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इसमें समावेशी कक्षा का वातावरण तैयार करने, बच्चों के सीखने में आने वाली बाधाओं को दूर करने और प्रत्येक बच्चे की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की रणनीतियों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
‘पहली शिक्षक-माँ’ पहल को मिलेगा बढ़ावा
कार्यशाला में प्रदेश की महत्वाकांक्षी पहल ‘पहली शिक्षक-माँ’ पर भी विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा। इस पहल के माध्यम से घर और विद्यालय के बीच सीखने की निरंतरता बनाए रखने तथा बच्चों के प्रारंभिक विकास में माताओं की भूमिका को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा। इसके साथ ही प्री-प्राइमरी कक्षाओं में शिक्षकों और आया-सहायिकाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और बच्चों की दैनिक गतिविधियों को व्यवस्थित ढंग से संचालित करने के गुर भी सिखाए जा रहे हैं।
कार्यशाला में समग्र शिक्षा के ECCE कंसल्टेंट दिलीप वर्मा, प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन से अर्चना सिंह, अलिश्बा, कुलदीप पुंडीर, केवल कृष्ण, जागृति शर्मा, रुबीना और पुरुषोत्तम ठाकुर सहित अन्य विशेषज्ञ मुख्य संसाधन व्यक्ति के रूप में प्रशिक्षण दे रहे हैं।
कार्यशाला के अंतिम दिन प्रतिभागी अपने-अपने जिलों में आयोजित होने वाले आगामी जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों की कार्ययोजना और रूपरेखा तैयार करेंगे। इसके बाद ये मुख्य संसाधन व्यक्ति संबंधित जिलों में ब्लॉक स्तर पर आया-सहायिकाओं और ‘पहली शिक्षक-माँ’ पहल के तहत माताओं को प्रशिक्षित करेंगे। इस तरह राज्य स्तरीय कार्यशाला से मिले प्रशिक्षण को जमीनी स्तर तक पहुंचाकर प्रदेश में प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और बच्चों के मजबूत शैक्षणिक आधार के निर्माण की दिशा में काम किया जाएगा।
📍 Location: शिमला (शिमला)
मेष: दिन शुभ रहेगा...