31 विद्यार्थियों ने हिमालयी जीवन और परंपराओं को करीब से समझा
Srishti Sharma
Students Explore Himalayan Traditions : कुल्लू। बीएमएल मुंजाल यूनिवर्सिटी, गुरुग्राम के 31 विद्यार्थियों ने “Living Lightly in the Himalaya” फील्ड कोर्स के तहत कुल्लू और लाहौल का दौरा किया। विद्यार्थियों ने पशुपालन, काठ-कुणी वास्तुकला, ऊन से जुड़े पारंपरिक शिल्प, प्राकृतिक रंगाई और स्थानीय आजीविका को करीब से समझा।
प्रो. संजय बरनैला के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य हिमालयी समुदायों के पारंपरिक ज्ञान, पशुपालन, पर्यावरण, संस्कृति, शिल्प और स्थानीय आजीविका को करीब से समझना था। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने चंद्रताल और लाहौल घाटी में भेड़पालक समुदायों से मुलाकात कर गद्दी पशुपालकों की पारंपरिक जीवनशैली तथा भेड़, चरागाह और हिमालयी पर्यावरण के बीच संबंध को समझा। नग्गर में हिमालयन ब्रदर्स एडवेंचर के सहयोग से एक दिवसीय काठ-कुणी वास्तुकला कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें विद्यार्थियों ने हिमाचल की पारंपरिक निर्माण तकनीक को समझते हुए काठ-कुणी के मॉडल तैयार किए।
इसके अलावा विद्यार्थियों ने कुल्लवी व्हिम्स से जुड़ी स्थानीय महिला कारीगरों के साथ दो दिवसीय कार्यशाला में भाग लिया। इसमें उन्होंने स्थानीय ऊन से कताई, बुनाई, निटिंग और प्राकृतिक रंगाई जैसी पारंपरिक प्रक्रियाओं को प्रत्यक्ष रूप से सीखा। स्थानीय स्तर पर इस फील्ड कार्यक्रम को हिमालयन ब्रदर्स एडवेंचर, नग्गर की ओर से ब्रिघु आचार्य और आकांक्षा ने समन्वित किया। इस दौरान विद्यार्थियों को स्थानीय चरवाहों, कारीगरों और पारंपरिक ज्ञान रखने वाले लोगों से सीधे संवाद का अवसर मिला। इस फील्ड कोर्स ने विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर दिया कि हिमालय में प्रकृति, पारंपरिक ज्ञान, स्थानीय आजीविका, वास्तुकला और संस्कृति एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं।