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राष्ट्रगान विवाद पर सुक्खू सरकार पर हमला, विशेषाधिकार हनन का नोटिस

Sukhu government attacked over national anthem controversy : शिमला। राष्ट्रगान विवाद को लेकर हिमाचल प्रदेश की सियासत गरमा गई है। भाजपा विधायक दल ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू पर सदन में बार-बार झूठ बोलने और विपक्ष को बदनाम करने का आरोप लगाते हुए विधानसभा अध्यक्ष के चैंबर में विशेषाधिकार हनन का नोटिस सौंपकर कार्रवाई की मांग की।

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वह मुख्यमंत्री की तरह नहीं, बल्कि ‘झूठमंत्री’ की तरह काम कर रहे हैं। उन्होंने सरकार पर आउटसोर्स कर्मचारियों की छंटनी, भर्ती में कथित अनियमितताओं और हिमकेयर योजना से इलाज न मिलने के कारण पालमपुर निवासी रमेश चंद्र की मौत को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। अब मुख्यमंत्री के पास अपने बचाव के लिए कुछ रह नहीं गया है। सदन में वह बार-बार बेनकाब हो चुके हैं। उनका झूठ पकड़ा जा चुका है, लेकिन विदेश तक झूठ बोलने का परचम फहरा चुके हैं। अपनी विश्वसनीयता खो चुके हैं। उन्हें अपने पद की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए। जयराम ठाकुर ने कहा कि पाँच लाख नौकरी देने की गारंटी देकर सत्ता में आए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू आज कह रहे हैं कि वह नौकरी नहीं दे सकते हैं। आउटसोर्स के नाम पर उन्होंने दस हज़ार से ज़्यादा लोगों को नौकरी से निकाल दिया। इसके बाद आउटसोर्स पर भर्ती के लिए अपने मित्रमंडल की रातों-रात कंपनियाँ बनवाईं। उन्हें आउटसोर्सिंग का ठेका दे दिया। प्रदेश में पहली बार आउटसोर्स पर नौकरी देने के लिए भी लोगों से मोटी रकम वसूली गई।

इतनी लूट और अराजकता को सत्ता का संरक्षण बेहद शर्मनाक है। अपने मित्रों की आउटसोर्स कंपनियों पर मेहरबानी दिखाने के लिए माननीय उच्च न्यायालय ने भी सवाल उठाए हैं। 8 अगस्त को माननीय उच्च न्यायालय ने एक कंपनी को चयनित करने और दूसरी कंपनी को ख़ारिज करने के कारण पूछे तो सरकार के पास कोई जवाब नहीं था। यह सरकार ईमानदारी से आउटसोर्स पर नौकरी देने वाली कंपनियों का चयन भी नहीं कर सकती, इसलिए इस सरकार से ईमानदारी की उम्मीद करना बेईमानी है। जयराम ठाकुर ने कहा कि कल ही मीडिया के माध्यम से पालमपुर के चुधरेहड़ निवासी रमेश चंद्र की इलाज के अभाव में मौत का मामला दिल दहला देने वाला है। वह वीडियो देखकर मन बहुत व्यथित है। हमारे प्रदेश के लोगों की जान से बढ़कर कुछ नहीं है, लेकिन सिर्फ़ डेढ़ लाख रुपये के कारण उनकी जान गई और परिवार बेसहारा हो गया। रमेश चंद्र को दिल का दौरा पड़ा था। उन्हें तत्काल इलाज की आवश्यकता थी, लेकिन निजी अस्पताल में हिमकेयर बंद होने के कारण उन्हें स्टेंट नहीं लग पाया और टांडा अस्पताल ले गए, लेकिन तब तक बहुत देर हो गई थी। जब हिमकेयर से इलाज होता था तो ऐसा कभी नहीं होता था। मरीज का बिना किसी खर्च के तत्काल इलाज होता था और हज़ारों लोगों की जान बचती थी।

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