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हिमाचल के हक और संसाधनों की रक्षा में सुक्खू सरकार ने कायम की मिसाल

बिलासपुर: तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति, प्रभावी कानूनी पैरवी, अंतरराज्यीय संवाद और रणनीतिक निर्णयों के माध्यम से हिमाचल के अधिकारों एवं आर्थिक हितों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इन प्रयासों से प्रदेश को लंबे समय से लंबित अधिकार मिलने के साथ आय के नए स्रोत विकसित करने के अवसर भी मिले हैं।

उन्होंने कहा कि भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) की परियोजनाओं में हिमाचल प्रदेश की 7.19 प्रतिशत बिजली हिस्सेदारी के बकाये को लेकर दशकों से विवाद चल रहा था। सर्वोच्च न्यायालय ने 6 नवंबर 2026 को निर्णय सुनाते हुए पंजाब और हरियाणा को अगले 20 वर्षों में हिमाचल प्रदेश को 11,973 मिलियन यूनिट बिजली उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत लगभग 598 मिलियन यूनिट बिजली प्रतिवर्ष दी जाएगी। न्यायालय ने 420.77 करोड़ रुपये की पूंजीगत लागत संबंधी देनदारी को भी बिजली बकाये से समायोजित करने का निर्देश दिया है। इस फैसले से प्रदेश को अतिरिक्त बिजली के उपयोग एवं बिक्री के माध्यम से राजस्व अर्जित करने का अवसर मिलेगा।

धर्माणी ने कहा कि वाइल्ड फ्लावर हॉल संपत्ति विवाद में लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 31 मार्च 2025 को होटल का कब्जा राज्य सरकार को वापस मिला। अब इसके 35 वर्षों के संचालन के लिए 47.1 प्रतिशत वार्षिक सकल राजस्व हिस्सेदारी की व्यवस्था की गई है, जिससे प्रदेश को दीर्घकालिक आय प्राप्त होगी। कड़छम-वांगतू जलविद्युत परियोजना में भी प्रदेश सरकार की प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरूप रॉयल्टी 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत करने का मार्ग प्रशस्त हुआ। इससे प्रदेश को लगभग 150 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वार्षिक आय होने का अनुमान है। अन्य पात्र जलविद्युत परियोजनाओं में भी रॉयल्टी बढ़ने से राज्य के राजस्व में वृद्धि की संभावना है।

मंत्री ने कहा कि किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर भी प्रदेश सरकार ने अंतरराज्यीय बातचीत और रणनीतिक प्रयासों से अपने वित्तीय हितों को सुरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। परियोजना के जल घटक की 90 प्रतिशत लागत केंद्र सरकार द्वारा वहन किए जाने तथा बिजली घटक में हिमाचल के हिस्से की लागत को लेकर अन्य राज्यों के साथ बनी सहमति से प्रदेश पर पड़ने वाले संभावित वित्तीय बोझ में लगभग 800 करोड़ रुपये की राहत का अनुमान है।

मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि इन निर्णयों का लाभ केवल सरकारी खजाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे प्रदेश की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होंगे। अतिरिक्त बिजली मिलने से ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने तथा बिजली की बिक्री से आय अर्जित करने में मदद मिलेगी। वहीं, जलविद्युत परियोजनाओं में बढ़ी हुई रॉयल्टी और सरकारी संपत्तियों से मिलने वाली राजस्व हिस्सेदारी से राज्य की नियमित आय में वृद्धि होगी। इससे स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, पेयजल और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं पर अधिक संसाधन खर्च करने की संभावनाएं बढ़ेंगी।

उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां दर्शाती हैं कि वर्तमान सरकार केवल कानूनी लड़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि आपसी समन्वय, अंतरराज्यीय संवाद और दूरदर्शी निर्णयों के माध्यम से भी हिमाचल के हितों को आगे बढ़ा रही है। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों का उचित मूल्य मिले और उनसे अर्जित होने वाली आय का लाभ राज्य की अर्थव्यवस्था तथा आम जनता तक पहुंचे। प्रदेश सरकार की प्राथमिकता हिमाचल की संपदा और अधिकारों की रक्षा करने के साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करना है, ताकि संसाधनों से प्राप्त राजस्व का उपयोग विकास कार्यों और जनकल्याण के लिए किया जा सके।

📍 Location: शिमला (शिमला)

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