शिमला। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की ओर से बड़सर मे स्वतंत्रता दिवस समारोह मे अनेको वर्गो के लिए घोषणाए की गई, लेकिन करूणामूलक परिवारों को लेकर मुख्यमंत्री दवारा कोई घोषणा नहीं की गई। आखिरकार इन परिवारों को सरकार क्यों अनदेखा कर रही है।
प्रदेशअध्यक्ष रविंद्र अत्री का कहना है की अनेको बार करूणामूलक परिवार मुख्यमंत्री से अपनी मांगों और समस्याओं के लेकर मिलते आ रहे है परंतु मुख्यमंत्री दवारा हर बार इन परिवारो को आज तक आश्वासन मिलता आया है और आज तक इनकी समस्याओ का समाधान नही हो पाया है और इस बार फिर करूणामूलक परिवारो को निराशा मिली है ।हिमाचल प्रदेश के समस्त करूणामूलक परिवारो मे सरकार की इस अनदेखी का भारी रोष है।
प्रदेशअध्यक्ष रविंद्र अत्री का कहना है कि उनकी प्रमुख मांगो मे जो करूणामूलक नीति मे वार्षिक आय सीमा 3 लाख रुपए का भेदभाव है उसे खत्म किया जाए और 3 लाख रुपए से अधिक आय वाले 1650 के करीब आश्रितो को बिना किसी शर्त को वन टाइम सेटलमेंट दी जाए या (Income Criteria ) को 3 लाख रुपये से बढाकर 5 लाख रुपये तक किया जाए। ताकि कोई भी आश्रित नौकरी से वंचित ना रह पाए।
रविंद्र अत्री का यह भी कहना है कि चाहे किसी आश्रित की वार्षिक आय 3 लाख हो या 3 लाख रुपये से अधिक है सरकारी सेवाकाल के दौरान सभी ने अपने अपने माता व पिता और घर के कमाने वाले मुखिया को खोया है। तो प्रदेश सरकार सौतेला व्यवहार ना करते हुए सभी को एक समान दृष्टि से वन टाइम सेटलमेंट के तहत जल्द नौकरीया प्रदान करें। क्योकि लम्बे समय से ये लोग नौकरी के इंतजार में दर-दर की ठोकरे खाने को आज भी मजबूर है।
प्रदेशअध्यक्ष रविंद्र अत्री मुख्यमंत्री और प्रदेश सरकार से विनम्र प्रार्थना करते है कि जल्द करूणामूलक आश्रितों के हित मे करूणा दिखाकर करूणामय फैसला लिया जाए। ताकि लम्बे समय से भटक रहे परिवारो को राहत मिल सके।
📍 Location: शिमला (शिमला)
मेष: दिन शुभ रहेगा...