शिमला: भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप ने ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में दून विधानसभा क्षेत्र के बद्दी में आयोजित रक्तदान शिविर में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने रक्तदाताओं का उत्साहवर्धन किया और रक्तदान को मानव सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
सुरेश कश्यप ने राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश में उपलब्ध केंद्रीय संसाधनों के उपयोग और कार्ययोजना प्रस्तुत करने में हुई देरी को लेकर सामने आई समाचार रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि समाचार रिपोर्ट में प्रकाशित लेखा परीक्षा के निष्कर्ष प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। केंद्र सरकार द्वारा संसाधन उपलब्ध करवाए जाने के बावजूद राज्य सरकार समय पर कार्ययोजना तैयार करने और उपलब्ध धनराशि का उपयोग सुनिश्चित करने में पीछे रही है।
तीन वर्षों तक करोड़ों रुपये शेष रहने पर सरकार दे जवाब : सुरेश कश्यप
सुरेश कश्यप ने कहा कि समाचार रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय आयुष मिशन में हिमाचल प्रदेश के लिए केंद्र और राज्य के बीच वित्त पोषण का अनुपात 90:10 है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2022-23 में स्वीकृत आवंटन 77.47 करोड़ रुपये था। इस दौरान 39.59 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि 21.27 करोड़ रुपये अंत में शेष रहे। वित्त वर्ष 2023-24 में स्वीकृत आवंटन 73.18 करोड़ रुपये रहा। इस दौरान 55.89 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि वर्ष के अंत में शेष राशि बढ़कर 27.56 करोड़ रुपये हो गई। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 के अंत में भी संबंधित खाते में 38.35 करोड़ रुपये शेष थे, जबकि उस वर्ष केवल 21.42 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
कश्यप ने सवाल उठाया कि जब प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की आवश्यकता है और राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत संसाधन उपलब्ध हैं, तो सरकार इनका समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित क्यों नहीं कर पाई? उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि उपलब्ध धनराशि किन कारणों से खर्च नहीं हो सकी और संबंधित विभागों की जवाबदेही तय करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
कार्ययोजना जमा करने में दो महीने की देरी पर भी उठाए सवाल
सुरेश कश्यप ने कहा कि समाचार रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 के लिए राज्य की वार्षिक कार्ययोजना जमा करने की अंतिम तिथि 15 मार्च 2024 निर्धारित थी, जबकि हिमाचल प्रदेश ने इसे 17 मई 2024 को प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि निर्धारित समयसीमा के लगभग दो महीने बाद कार्ययोजना प्रस्तुत करना प्रशासनिक स्तर पर गंभीर देरी को दर्शाता है।
कश्यप ने कहा कि लेखा परीक्षा में उपलब्ध संसाधनों के समयबद्ध उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। उन्होंने बताया कि केंद्र के दिशा-निर्देशों के अनुसार अगली किस्त प्राप्त करने के लिए कम से कम 75 प्रतिशत उपयोगिता प्रमाणपत्र प्राप्त होना आवश्यक है। इसके साथ ही एकल नोडल एजेंसी के खाते में उपलब्ध राशि स्वीकृत राशि के 12.5 प्रतिशत से कम होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इन शर्तों के अनुपालन की स्थिति क्या रही और कार्ययोजना में देरी का मिशन के क्रियान्वयन पर क्या प्रभाव पड़ा।
आयुष सेवाओं के विस्तार के लिए उपलब्ध धनराशि का उपयोग सुनिश्चित करे सरकार
सुरेश कश्यप ने कहा कि राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत उपलब्ध संसाधनों का उद्देश्य आयुष चिकित्सा सुविधाओं को सुदृढ़ करना और जनता तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे में उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के उपयोग में देरी की समीक्षा होनी चाहिए।
उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत पिछले तीन वित्त वर्षों की स्वीकृत धनराशि, वास्तविक व्यय, शेष राशि, कार्ययोजनाओं की स्थिति और लंबित परियोजनाओं का विस्तृत विवरण सार्वजनिक किया जाए। कश्यप ने कहा कि सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि वर्ष 2024-25 के अंत में शेष रही 38.35 करोड़ रुपये की राशि के उपयोग के लिए क्या कार्ययोजना बनाई गई है और संबंधित परियोजनाओं को पूरा करने की समयसीमा क्या निर्धारित की गई है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाना सरकार की जिम्मेदारी है और इसके लिए उपलब्ध संसाधनों का पारदर्शी एवं समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
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