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पत्नी की याद में बनवाई 15 मंजिला इमारत, बदल दिया पूरे गांव का नाम; आज भी कायम है चेहनी कोठी

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कुल्लू: देश-दुनिया में प्रेम की कई कहानियां इतिहास का हिस्सा बनी हैं, लेकिन हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में मौजूद चेहनी कोठी की कहानी कुछ अलग है। बंजार उपमंडल के चेहनी गांव में बनी यह ऐतिहासिक इमारत सदियों बाद भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। बताया जाता है कि एक ठाकुर ने अपनी पत्नी की याद में न सिर्फ विशाल कोठी का निर्माण करवाया, बल्कि गांव का नाम भी पत्नी के नाम पर रख दिया।

पत्नी की याद में बदला गांव का नाम

स्थानीय जानकारी के अनुसार, ढाढिया ठाकुर अपनी पत्नी चैहनी से बेहद प्रेम करते थे। पत्नी के गंभीर रूप से बीमार होने के बाद उन्होंने ऐसी इमारत बनाने की इच्छा जताई थी, जो आने वाली पीढ़ियों को उनकी याद दिलाती रहे।

पत्नी के निधन के बाद ठाकुर ने एक भव्य कोठी का निर्माण करवाया। बताया जाता है कि उस समय इस इमारत में करीब 15 मंजिलें थीं। इतना ही नहीं, जिस गांव का पुराना नाम ‘कठेड़’ बताया जाता है, उसका नाम भी ठाकुर ने अपनी पत्नी के नाम पर चेहनी रख दिया।

भूकंप ने बदली इमारत की तस्वीर

समय बीतने के साथ कोठी की ऊपरी मंजिलें क्षतिग्रस्त होती गईं। वर्ष 1905 के विनाशकारी भूकंप में भी इसकी दो मंजिलों को नुकसान पहुंचा। वर्तमान में इस ऐतिहासिक इमारत की करीब 9 मंजिलें ही शेष हैं।

इसके बावजूद पत्थर और लकड़ी से बनी चेहनी कोठी की अनूठी वास्तुकला आज भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है। देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों से आने वाले पर्यटक भी इस ऐतिहासिक धरोहर को देखने के लिए गांव पहुंचते हैं।

नौ मंजिलें बचीं, लेकिन आकर्षण आज भी बरकरार

निखिल ठाकुर के अनुसार वह अपने परिवार के साथ पहले भी चेहनी कोठी में देवी-देवताओं के दर्शन के लिए आ चुके हैं। उन्होंने बताया कि बाहरी राज्यों से भी बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं।

पत्थर और लकड़ी से बनी यह ऐतिहासिक इमारत भले ही समय और प्राकृतिक आपदाओं के कारण पहले जैसी नहीं रही, लेकिन इसकी वास्तुकला, धार्मिक मान्यताएं और प्रेम से जुड़ी कहानी आज भी इसे खास बनाती हैं। 15 मंजिला बताई जाने वाली यह कोठी अब 9 मंजिलों के साथ खड़ी है, लेकिन इसका आकर्षण सदियों बाद भी कम नहीं हुआ है।

देवता श्रृंगा ऋषि और माता दुर्गा से जुड़ी है मान्यता

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार चेहनी कोठी का धार्मिक महत्व भी काफी अधिक है। भगवान मुरलीधर मंदिर के पुजारी चेत राम शर्मा के अनुसार, कोठी की ऊपरी मंजिलों में देवता श्रृंगा ऋषि से जुड़ी शक्तियों को स्थापित किया जाता था।

मान्यता है कि जब देवता श्रृंगा ऋषि किसी क्षेत्र के दौरे से वापस लौटते हैं तो उनके साथ विभिन्न शक्तियां भी आती हैं। इन शक्तियों की पूजा-अर्चना इसी कोठी में किए जाने की परंपरा बताई जाती है।

कोठी में भगवान श्रृंगा ऋषि और अन्य देवी-देवताओं के प्रतीक चिन्ह भी रखे गए हैं, जिनकी विशेष अवसरों और त्योहारों पर पूजा की जाती है। सुरक्षा कारणों से वर्तमान में आम लोगों के लिए इमारत के अंदर प्रवेश प्रतिबंधित बताया गया है।

वास्तुकला देखकर हैरान होते हैं पर्यटक

मनाली से पहुंचे आर्यन ठाकुर ने बताया कि उन्होंने चेहनी कोठी के बारे में पहले भी काफी सुना था। यहां पहुंचने के बाद उन्होंने इसकी खूबसूरती और निर्माण शैली को करीब से देखा। उन्होंने कहा कि पत्थरों को आपस में जोड़कर तैयार की गई इस इमारत की शैली बेहद आकर्षक है।

वहीं लवली शर्मा ने बताया कि चेहनी कोठी देवता श्रृंगा ऋषि को समर्पित मानी जाती है। यहां आने वाले श्रद्धालु देवता के दर्शन के साथ कोठी को भी देखते हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार कोठी में माता दुर्गा की शक्तियां भी स्थापित हैं और श्रद्धालु यहां अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं।

📍 Location: Kullu (Kullu)

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