शिमला : हिमाचल प्रदेश में चिट्टे के कारोबार के खिलाफ सरकार ने अब तक का सबसे सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने साफ शब्दों में कहा है कि चिट्टे के कारोबार में शामिल गुनहगार न केवल कड़ी कानूनी कार्रवाई का सामना करेंगे, बल्कि उन्हें पंचायत चुनाव लड़ने के अधिकार से भी वंचित किया जाएगा। इसके लिए पंचायती राज अधिनियम में आवश्यक संशोधन किया जाएगा और यह व्यवस्था आगामी पंचायत चुनावों में ही लागू होगी।
बुधवार को शिमला में पत्रकार वार्ता के दौरान अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि सरकार चिट्टे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि इस अवैध कारोबार में संलिप्त 11 सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त किया जा चुका है जबकि कई और कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोषियों पर ही नहीं बल्कि अवैध तरीके से अर्जित उनकी संपत्तियों पर भी बुलडोजर चलाया जाएगा। मंत्री ने घोषणा की कि 21 और 22 जनवरी को प्रदेश की सभी 3577 ग्राम पंचायतों में एंटी-चिट्टा ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा।
इन सभाओं के माध्यम से चिट्टे जैसी सामाजिक बुराई के खिलाफ जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसके अलावा युवाओं को सकारात्मक दिशा देने के लिए प्रीमियर लीग की तर्ज पर एंटी-चिट्टा स्पोर्ट्स टूर्नामेंट आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि प्रदेश की 264 पंचायतें चिट्टे से सर्वाधिक प्रभावित हैं और सरकार के पास इस कारोबार से जुड़े अपराधियों और नशे के आदी लोगों का पूरा डाटा उपलब्ध है। सूचना देने वालों को पुरस्कृत किया जा रहा है और उनकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।

